किसानों द्वारा उगाई जाने वाली प्रत्येक फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सहित अन्य मांगों को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 6 मार्च को सुनवाई करेगा. चारणपाल सिंह बागड़ी की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अभय एस ओका ने नोट दाखिल नही करने पर फटकार भी लगाई है. कोर्ट ने कहा अब वकील व्यक्तिगत रूप से पार्टियों के लिए पेश होने लगे है. हम हर दिन यह देख रहे है. इस प्रथा की हमें निंदा करनी चाहिए.
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या आप वकालतनामा के बिना व्यक्तिगत रूप से पार्टी के लिए पेश हो सकते है? कोर्ट ने कहा कि आपको व्यक्तिगत रूप से पक्ष रखने कोई अधिकार नहीं है. चारणपाल सिंह बागड़ी की ओर से दायर याचिका में एमएसपी सुधार, फसल विविधीकरण और पराली जलाने की समस्या से निपटने के उपायों से संबंधित मांग की गई है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, पंजाब सरकार और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में धान की तुलना में नई फसलों का एमएसपी अधिक तय करके धान के स्थान पर नई वैकल्पिक फसलें उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है.
जानें क्या है मामला
यह याचिका 2019 में दायर की गई थी, जिसमें धान के स्थान पर मिट्टी, भूमि या भौगोलिक स्थिति की गुणवत्ता के अनुसार नई वैकल्पिक फसलें उपलब्ध कराए और नई फसलों का एमएसपी धान से अधिक तय करें क्योंकि इससे भूमिगत जल समाप्त हो जाता है, जिससे धान के अवशेषों को जलाने के समय भूमि अवतलन और प्रदूषण हो सकता है. उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा के किसान गेंहू और धान उगाने के लिए मजबूर है. क्योंकि इन दोनों फसलों पर एमएसपी है और सरकार इनकी खरीद करती है, जबकि इस खेती के तरीके से तीन समस्याएं पैदा हुई है- भूमिगत जल नक तेजी से खत्म होना, पराली जलाने से प्रदूषण और अतिरिक्त धान के भंडारण के कारण राज्य पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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