CJI Sanjiv Khanna: सीजेआई संजीव खन्ना (CJI Sanjiv Khanna) के कार्यकाल का आज आखिरी दिन है. सीजेआई (CJI)के तौर पर उन्होंने कई अहम फैसले दिए है. सीजेआई के तौर पर संजीव खन्ना (Sanjiv Khanna) के कार्यकाल लगभग सात महीने का रहा. जस्टिस संजीव खन्ना 18 जनवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्त हुए थे. 2005 में जस्टिस खन्ना को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) का जस्टिस बनाया गया था. उनका जन्म 14 मई 1960 को हुआ था. उन्होंने दिल्ली से शिक्षा प्राप्त की है. दिल्ली विश्वविद्यालय के सीएलसी (कैंपस लॉ सेंटर) से लॉ की पढ़ाई की.
दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट से वकालत की थी शुरू
1983 में दिल्ली बार काउंसिल में एक वकील के तौर पर पंजीकृत होने के बाद उन्होंने दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट से वकालत शुरू की थी. उन्होंने आयकर विभाग के लिए वरिष्ठ स्थायी वकील के रूप में लंबे समय तक काम किया. वाणिज्यिक कानून, कंपनी कानून, भूमि कानून, पर्यावरण कानून और चिकित्सा लापरवाही जैसे क्षेत्रों में भी काम किया. 2004 में उन्हें दिल्ली सरकार के स्थायी वकील के रूप में नियुक्त किया. वह बहुचर्चित रिटायर्ड जस्टिस एचआर खन्ना के भतीजे है.
जस्टिस संजीव खन्ना के अब तक के कई अहम फैसले
उन्होनें कई अहम फैसले दिए है. नवंबर-दिसंबर 2024 में, देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया था, जब कुछ अदालतों ने यह दावा करते हुए मस्जिदों के सर्वे के आदेश दिए कि उनके नीचे अवशेष हैं. इस स्थिति में सीजेआई खन्ना ने हस्तक्षेप करते हुए आदेश दिया गया भविष्य में धार्मिक स्थलों के खिलाफ कोई नई याचिका दर्ज न कि जाए और निचली अदालतें सर्वे आदेश या अन्य प्रभावी अंतरिम आदेश पारित न करें.
धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) बनाम चुनाव आयोग के मामले में जस्टिस संजीव खन्ना ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर डाले गए वोटों के 100 प्रतिशत वीवीपीएटी सत्यापन की मांग करने वाली एडीआर की याचिका को खारिज कर दिया था. जस्टिस खन्ना ने अपने आदेश में लिखा कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ईसीआर द्वारा अपनाए गए सभी सुरक्षा उपायों को रिकॉर्ड में रखना चाहते हैं. ईवीएम की विशेषता को कम करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रणाली वोटों की त्वरित, त्रुटि मुक्त और गिनती सुनिश्चित करती है.
इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित
वही जस्टिस खन्ना ने फरवरी 2024 में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करने वाले पांच-न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ का हिस्सा थे. यह फैसला पारदर्शिता और भ्रष्टाचार की संभावना चिंताओं के कारण लिया गया था. जस्टिस खन्ना ने इस तर्क को खारिज कर दिया था कि बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किए गए दान पर दाता की गोपनीयता लागू होती है. उन्होनें कहा कि बॉन्ड को संभालने वाले बैंक अधिकारियों को दानदाताओं की पहचान के बारे में पता होता है.
पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले पर व्यक्त की सहमति
2023 में जस्टिस खन्ना ने पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले पर सहमति व्यक्त की, जिसने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की वैधता को बरकरार रखा. उन्होंने पाया कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की वैधता को बरकरार रखा. उन्होंने पाया कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 370 असममित संघवाद की विशेषता थी न कि संप्रभुता का संकेत, और इसका निरस्तीकरण संघीये ढांचे को नकारता नहीं है.
न्यायिक स्वतंत्रता और पारदर्शिता के मुद्दे पर सुनाया अहम फैसला
न्यायिक स्वतंत्रता और पारदर्शिता के मुद्दे पर भी साल 2019 में जस्टिस संजीव खन्ना ने अहम फैसला सुनाया था. इस फैसले में कहा गया था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत सूचनाओं के अधीन हो सकता है. हर केस में जजों की निजता के साथ-साथ पारदर्शिता भी होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को जनवरी 2021 में अनुमति दी थी. इस प्रोजेक्ट के तहत बाकी निर्माण के अलावा दिल्ली में नया संसद भवन भी बनाया गया है. तीन जजों की बेंच ने 2-1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया.
जस्टिस संजीव खन्ना ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के खिलाफ दिया था फैसला
जस्टिस खनविलकर और जस्टिस दिनेश महेश्वरी ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को अनुमति दी थी, जबकि जस्टिस संजीव खन्ना ने इसके खिलाफ फैसला दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पर्यावरण मंत्रालय से भविष्य की परियोजनाओं में स्मॉग टावर लगाने के लिए कहा था. जस्टिस संजीव खन्ना ने जमीन के इस्तेमाल में बदलाव को लेकर आपत्ति जताई थी.
जस्टिस खन्ना ने जमीन के इस्तेमाल में बदलाव पर जताया असहमति
जस्टिस खन्ना ने जमीन के इस्तेमाल में बदलाव पर दिए फैसले से असहमति जताते हुए कहा था कि इस केस में हेरिटेज कमेटी का पहले अप्रूवल होना चाहिए था. उन्होंने अपने फैसले में लिखा था, चूंकि जस्टिस एएम खनविलकर के साथ जनता की हिस्सेदारी, कानूनी प्रावधानों की व्याख्या, हेरिटेज कमेटी की अप्रूवल ना होने और एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी के आदेश को लेकर मेरा दुराव है, के लिहाजा मैन अलग से असहमति का फैसला लिखा है.
-भारत एक्सप्रेस
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