-सुप्रीम कोर्ट
Triple Talaq Law: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि वर्ष 2019 में ट्रिपल तलाक को अपराध घोषित किए जाने के बाद केरल में 203 मामले दर्ज किया गया है. जिसमें एक 178 मामलों में चार्जशीट दाखिल किया जा चुका है. मुस्लिम महिलाओं को तत्काल तीन तलाक की प्रथा से कानूनी सुरक्षा देने के लिए वर्ष 2019 में कानून बनाया गया था.
2021 में 43 मामलों में एफआईआर दर्ज
केरल में 2019 में 25 एफआईआर दर्ज किया गया था, जिसके से 22 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुका है. जबकि 2020 में 38 एफआईआर दर्ज किया गया, जिनमें से 33 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है. वही 2021 में 43 मामलों में एफआईआर दर्ज किया गया है, इसमें से 41 में चार्जशीट दाखिल किया गया है. 2022 में दर्ज 29 एफआईआर में 25 में चार्जशीट दाखिल किया गया है. 2023 में 16 एफआईआर दर्ज किया गया और सभी मे चार्जशीट दाखिल हो चुका है. 2024 में 20 एफआईआर दर्ज किया गया और 18 में चार्जशीट दाखिल की गई है.
कानून के तहत पत्नी को तत्काल तलाक देना अपराध
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट अगस्त 2017 में शायरा बानो बनाम केंद्र सरकार मामले में तत्काल तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. संविधान पीठ ने 3:2 की बहुमत से यह फैसला दिया था. केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिला अधिनियम 2019 बनाया. इस कानून के तहत पति की ओर से पत्नी को तत्काल तलाक देना अपराध है. कानून में मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दिए गए तत्काल तलाक को भी इसके दायरे में रखा गया है. इसके बाद अधिकतम तीन साल तक कि सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है. समस्त केरला जमीयत उलेमा की ओर से याचिका दायर कर 2019 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है.
अनुच्छेद 14, 15 और 21 के विपरीत बताते हुए रद्द करने की मांग की
दायर याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि पति द्वारा किया गया ऐसा कृत्य, जिससे विवाह कानूनी रूप से समाप्त ही नहीं होता, उसके लिए आपराधिक सजा का प्रावधान किस हद तक उचित है. याचिककर्ताओ ने कानून को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के विपरीत बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है. वही केंद्र सरकार ने कानून का बचाव करते हुए कहा कि किसी आचरण को आपराधिक कृत्य घोषित करना और उसके लिए सजा तय करना विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है. सरकार के मुताबिक अदालत को यह तय नहीं करना चाहिए कि किसी विशेष आचरण को सिविल गलत माना जाए या आपराधिक अपराध.
-भारत एक्सप्रेस
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