Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद की ओर से दायर जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली दंगे साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय लिया.

Quentin Deacon Drug Case
Edited by Akansha

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद की ओर से दायर जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से दायर जमानत याचिका का विरोध किया है.

उन्होंने कहा कि जो देश के खिलाफ है, उनका असली जगह जेल है. एसजी मेहता ने कहा कि यह कोई सामान्य जमानत याचिका नहीं है, बल्कि सुनियोजित और संगठित दंगे का मामला है, जिसका उद्देश्य भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुचाना था. उन्होंने आरोप लगाया जा इमाम और खालिद ने जानबूझकर उस दिन को चुना जिससे अशांति फैले और भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम किया जा सके.

58 गवाहों के बयान दर्ज

एसजी मेहता ने यह भी कहा कि अगर कोई राष्ट्रविरोधी स्तर पर ऐसी हरकत करता है, तो उसे जमानत का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली दंगों की जांच अब तक कि सबसे बेहतरीन जांचों में भी एक है और धारा 164 के तहत 58 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं.

एसजी मेहता ने कहा कि उमर खालिद गुलफिशा और अन्य आरोपी व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए लगातार संपर्क में थे और साजिश रच रहे थे. उन्होंने कहा कि दंगे पूर्व नियोजित और संगठित थे, जिनका उद्देश्य बेहद खतरनाक था, इसलिए आरोपी किसी भी तरह की राहत के हकदार नहीं है. एसजी मेहता ने आरोप लगाया जा इन लोगों का मकसद देश को धर्म के आधार पर बांटना और अस्थिरता फैलाना था. उन्होंने कहा कि इनका उद्देश्य था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया इसपर ध्यान दे और भारत की छवि को बदनाम किया जाए. इसके लिए एक समाचार पत्र में छपे हेडलाइन का हवाला दिया गया.

मेहता ने जोर देकर कहा कि ये दंगे अचानक नहीं हुए थे-ये पूरी तरह से सोची-समझी और योजनाबद्ध साजिश का हिस्सा थे, जिसमें पुलिसकर्मी और निर्दोष नागरिक मारे गए. कोर्ट इस मामले के एक अन्य आरोपी शादाब अहमद की ओर से दायर जमानत याचिका पर10 जुलाई को सुनवाई करेगा. हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से शादाब अहमद की इस दलील पर बहस करने को कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज एक अन्य एफआईआर में उन्हें जमानत मिल गई है और संरक्षित गवाहों के बयानों में विरोधाभास है.

पिछली सुनवाई में उमर खालिद की ओर से पेश वकील त्रिपिद पेस ने दिल्ली पुलिस की ओर से साक्ष्य के तौर पर पेश किए गए व्हाट्सएप ग्रुप चैटिंग पर कहा था कि उमर खालिद तीन व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल जरूर था. लेकिन शायद ही किसी ग्रुप में मैसेज भेजा हो. उन्होंने कहा था कि किसी व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल होना भर किसी गलती का संकेत नहीं है. उन्होंने कहा था कि खालिद ने किसी के पूछने पर केवल विरोध स्थल का लोकेशन शेयर किया था.


भारत एक्सप्रेस

 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital