सुप्रीम कोर्ट से वोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में संशोधन किया है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि राहत केवल अतिरिक्त एजीआर बकाया पर ही नहीं, बल्कि एजीआर ब्याज और पेनल्टी पर भी लागू होगा.
मामला सुधार का न की संशोधन का
मामले की सुनवाई के दौरान वोडाफोन आइडिया की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा कि यह सुधार का मामला है, संशोधन का नहीं. उन्होंने कोर्ट को बताया कि आदेश के पैराग्राफ 6 में त्रुटि है, क्योंकि कंपनी ने केवल अतिरिक्त एजीआर बकाया पर ही नहीं, बल्कि सभी एजीआर देयों के पुनर्मूल्यांकन की भी मांग की थी.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वोडाफोन आइडिया ने दो बिंदुओं पर राहत मांगी थी. 1-अतिरिक्त एजीआर देयों के खिलाफ और 2- सभी एजीआर देयों के पुनर्मूल्यांकन के लिए. वोडाफोन आइडिया का अतिरिक्त एजीआर बकाया 9450 करोड़ है. कंपनी पर कुल एजीआर देनदारी 83500 करोड़ (मार्च 2025) तक बताई गई है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था यह नीतिगत मामला है और केंद्र सरकार इस पर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकती है.
केंद्र सरकार की कंपनी में 49% की हिस्सेदारी
कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में केंद्र सरकार ने कंपनी में 49% हिस्सेदारी ली है और 20 करोड़ से अधिक ग्राहक इसकी सेवाएं ले रहे हैं. ऐसे में केंद्र सरकार को समीक्षा करने से नहीं रोका जा सकता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया था यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए पारित किया गया है. खासकर सरकार के इक्विटी निवेश और करोड़ों ग्राहकों के हित को ध्यान में रखते हुए किया गया है. 20 करोड़ ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया है. वोडाफोन-आइडिया ने एजीआर (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) बकाया को चुनौती दी थी. कंपनी ने 9450 करोड़ रुपये के अतिरिक्त एजीआर बकाया को गलत ठहराते हुए इसे अदालत में चुनौती दी थी.
वोडाफोन आइडिया का कहना था कि सरकार ने इस डिमांड में कुछ राशि को दोहराया है. ऐसे में इसमें सुधार करना चाहिए. याचिका में कंपनी ने अनुरोध किया था कि वह दूरसंचार विभाग को 3 फरवरी 2020 को पेश किए गए डिडक्शन वेरिफिकेशन गाइडलाइन का इस्तेमाल करके एजीआर बकाया की पूरी तरह से जांच करने के लिए कहें.
एजीआर बकाया पर जारी विवाद
दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन आइडिया को 2018-19 के लिए एजीआर बकाया के रूप में 2774 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने को कहा था. 9450 करोड़ रुपये की कुल मांग में से 2774 करोड़ रुपये विलय वाली कंपनी के लिए है, जबकि 5675 करोड़ रुपए विलय से पहले वोडाफोन समूह के बकाया के लिए है. वोडाफोन आइडिया का दावा है कि कुछ रकम दो बार जोड़ा गया है, जिसके लिए उसने वित्त वर्ष 2016-17 से पहले की अवधि के बकाए का मिलान करने की मांग की है.
इसके जवाब में DoT ने कोर्ट को बताया है कि यह मांग पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना के कारण नहीं है, बल्कि लंबित खातों को अंतिम रूप देने से उत्पन्न हुई है. विभाग ने वित्तीय खातों के बंद होने के बाद पाई गई असंगतियों को इसका कारण बताया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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