Healthy Lifestyle Tips: अक्सर हम अपने आस-पास ऐसे लोगों को देखते है जिनका खाने का मेन्यू हमेशा फिक्स रहता है. सुबह वही परांठा, दोपहर को दाल-चावल और रात में चुनिंदा सब्जियां. सुनने में ये काफी अनुशासित और आसान लगता है क्योंकि इससे ‘आज क्या बनाऊ?’ का सवाल पूरी तरह से खत्म हो जाता है.
कई लोगों का मानना है कि ये तरीका अपनाकर वजन कम करने का भी सबसे सुरक्षित तरीका है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि खाना खाने का ये तरीका आपके पेट को धीरे-धीरे बीमारी का घर बना रहा है?
पेट के नन्हे सैनिकों को चाहिए वैरायटी
क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट बताते हैं कि हमारे पाचन तंत्र के अंदर करोड़ों सूक्ष्म जीव रहते हैं, जिन्हें हम ‘गुड बैक्टीरिया’ कहते हैं. ये बैक्टीरिया सिर्फ खाना नहीं पचाते बल्कि हमारी इम्यूनिटी और मूड को भी कंट्रोल करते हैं. जैसे हमें हर दिन एक ही काम करके बोरियत होती है वैसे ही इन जीवों को भी अलग-अलग तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है.
जब आप हफ्तों तक एक ही जैसा खाना खाते हैं तो इन सूक्ष्म जीवों को मिलने वाली विविधता खत्म हो जाती है. रिसर्च कहती है कि जो लोग हफ्ते भर में 20 से 30 अलग-अलग तरह की पेड़-पौधों से मिलने वाली चीजें (सब्जियां, फल, अनाज) खाते हैं उनका डाइजेशन उन लोगों के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत होता है जो सीमित डाइट पर रहते हैं.
एक जैसी थाली से बढ़ सकती हैं मुश्किलें
कई बार लोग कहते हैं कि “मैं तो रोज घर का बना सादा दाल-चावल ही खाता हूं, फिर भी पेट भारी क्यों रहता है?” न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार इसकी वजह भी भोजन की एकरसता ही है. लंबे समय तक बदलाव न करने से पेट में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या कम होने लगती है, जिससे कब्ज, गैस, ब्लोटिंग और फूड सेंसिटिविटी जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं. भले ही दाल-चावल हेल्दी है लेकिन शरीर को अलग-अलग अनाज और मौसमी सब्जियों से मिलने वाले फाइबर की भी उतनी ही जरूरत है.
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संतुलन कैसे बनाएं?
नियमितता अच्छी बात है, इससे कैलोरी काउंट करना और वजन संभालना आसान होता है. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेहत और स्वाद के बीच संतुलन बनाना जरूरी है. आपको अपनी पूरी डाइट रातों-रात बदलने की जरूरत नहीं है, बस छोटे-छोटे बदलाव करें.
अनाज बदलें: अगर रोज गेहूं खाते हैं, तो कभी रागी, बाजरा या ओट्स ट्राई करें.
प्रोबायोटिक्स: खाने में दही, छाछ या फर्मेंटेड चीजों को जगह दें.
रंगीन खाना: अपनी थाली को रंगीन बनाएं. जितनी ज्यादा रंग की सब्जियां और फल होंगे, उतने ही अलग तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को मिलेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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