Tô Lâm India Visit 2026: वियतनाम के राष्ट्रपति ‘टो लैम’ (Vietnam’s President Tô Lâm) के भारत आगमन पर जब राजकीय भोज की शुरुआत हुई, तो चर्चा केवल कूटनीति की नहीं बल्कि बिहार के उन जायकों की भी हुई जिन्होंने सदियों से हमारी पहचान को संजो कर रखा है.
यह केवल व्यंजन नहीं, बल्कि बिहार के मेहनतकश किसानों और कारीगरों की विरासत है, जिसे अब दुनिया सलाम कर रही है.
बिहार के हुनरमंद हाथों की कुशलता
दावत की शान बना नालंदा का ‘सिलाओ खाजा’ (Silao Khaja), जिसकी हर परत बिहार के गौरवशाली इतिहास की तरह महीन और अटूट है. वहीं गया की गलियों से निकला ‘अनरसा’ अपनी सोंधी खुशबू के साथ बिहार के पारंपरिक त्योहारों की याद दिला गया. जब वियतनामी डेलीगेट्स ने तिल से ढके इस अनरसे का स्वाद चखा, तो उन्हें बिहार के हुनरमंद हाथों की कुशलता का एहसास हुआ.
भोजन नहीं संस्कृति का प्रतीक
यही नहीं, मिथिला की पावन धरती का ‘मखाना’ (Fox nut) और हाजीपुर के उपजाऊ मैदानों की खुशबू समेटे ‘मालभोग केला’ (Malbhog banana) भी इस खास मेन्यू का हिस्सा रहे. मिथिला के लोगों के लिए मखाना सिर्फ भोजन नहीं, उनकी संस्कृति का प्रतीक है, और हाजीपुर का केला यहाँ के किसानों के समर्पण की मिठास है.
मिट्टी का स्वाद’ अब सीमाओं के पार
वैश्विक मंच पर बिहार के इन उत्पादों का परोसा जाना यह साबित करता है कि हमारी ‘मिट्टी का स्वाद’ अब सीमाओं को पार कर चुका है. यह हर बिहारी के लिए गर्व का क्षण है कि राज्य की सांस्कृतिक और कृषि विरासत आज अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के दिल में जगह बना रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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