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एक बार खा लिया तो भूल जाएंगे कटहल का स्वाद! मार्केट में तेजी से बढ़ रही है ब्रेडफ्रूट की डिमांड, जानें फायदे

Breadfruit Agriculture: कटहल जैसी दिखने वाली सब्जी ‘ब्रेडफ्रूट’ की मांग भारत समेत 90 देशों में बढ़ी. जानिए केरल-कर्नाटक में होने वाली इस सब्जी के जादुई फायदे.

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TRENDING CROP: गर्मियों के मौसम में कटहल की सब्जी खाना ज्यादातर लोगों को बेहद पसंद होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मार्केट में कटहल जैसी ही दिखने वाली एक और सब्जी इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रही है. इस सब्जी का नाम ‘ब्रेडफ्रूट’ (Artocarpus altilis) है, जिसे कटहल की छोटी बहन भी कहा जाता है. देखने में बिल्कुल कटहल जैसी लगने वाली यह सब्जी आकार में थोड़ी छोटी और गोल होती है. भारत समेत दुनिया के करीब 90 देशों में इसका क्रेज तेजी से बढ़ रहा है.

कटहल और ब्रेडफ्रूट में क्या है अंतर?

ब्रेडफ्रूट और कटहल दोनों एक ही वनस्पति परिवार ‘मोरासी’ (Moraceae) से ताल्लुक रखते हैं. दोनों का बाहरी हिस्सा हरा, मोटा और कांटेदार होता है. हालांकि, कटहल वजन में काफी भारी और बड़ा होता है, जबकि ब्रेडफ्रूट का वजन केवल 250 ग्राम से लेकर 6 किलोग्राम तक ही होता है. कच्चा होने पर इसे आलू या कटहल की तरह पकाकर खाया जाता है, जबकि पकने के बाद इसका स्वाद हल्का मीठा हो जाता है.

भारत के इन राज्यों में होती है पैदावार

ब्रेडफ्रूट मूल रूप से न्यू गिनी और पश्चिमी प्रशांत महासागर के द्वीपों की फसल है. भारत में इसकी सबसे ज्यादा खेती केरल में की जाती है, जहां लोग इसे ‘कदचक्का’ या ‘शीमाचक्का’ कहते हैं. केरल के लोग इसके स्वादिष्ट फ्रिटर्स, सब्जी और चिप्स बड़े चाव से खाते हैं. केरल के बाद कर्नाटक में इसका सबसे अधिक उत्पादन होता है, जहां इसे ‘नीर फणस’ के नाम से जाना जाता है. इसके अलावा तमिलनाडु, गोवा और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में भी इसकी खेती तेजी से फैल रही है.

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पर्यावरण और सेहत के लिए है वरदान

वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रेडफ्रूट का पेड़ पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद है. यह कम रखरखाव में भी साल भर में 200 से 300 किलोग्राम तक फल दे सकता है. यह पेड़ सालाना लगभग 1 टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता रखता है, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है. सेहत के लिहाज से भी यह गुणों की खान है. यह पूरी तरह से ग्लूटेन-फ्री होता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम, आयरन और कैल्शियम पाया जाता है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है, जिसके कारण यह डायबिटीज और दिल के मरीजों के लिए एक बेहतरीन सुपरफूड साबित हो रहा है.

भारत एक्सप्रेस



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