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कला के ‘लम्हे’ में क़ैद हुई ज़िंदगी: हौज़ ख़ास में तीन दिवसीय कला महोत्सव

आर्ट डेविल के बैनर तले लोकायत आर्ट गैलरी में 25 कलाकारों ने पेश की अपनी रचनात्मकता, कई गणमान्य लोगों ने किया उद्घाटन

नई दिल्ली। कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समय को थामने का एक करिश्मा भी है। इसी सोच को साकार करती हुई, राजधानी के ऐतिहासिक हौज़ खास गांव में स्थित लोकायत आर्ट गैलरी में तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी ‘लम्हे’ का आयोजन किया गया। 14 से 16 अगस्त तक चली इस प्रदर्शनी का आयोजन आर्ट डेविल संस्था ने किया, जिसने कला प्रेमियों को जीवन के अनमोल पलों से रूबरू कराने का एक सफल प्रयास किया।

‘लम्हे’ – जब कला बन जाए समय की व्याख्या

प्रदर्शनी का नाम ‘लम्हे’ अपने आप में काफ़ी मायने रखता है। ज़िंदगी के हर पल की अपनी एक अलग कहानी होती है, और इन्हीं कहानियों को कैनवस, मूर्तियों और तस्वीरों के ज़रिए उकेरा गया। इस आयोजन में पेंटिंग, फ़ोटोग्राफ़ी, स्कल्पचर, इंस्टॉलेशन और आर्ट व क्राफ़्ट सहित विभिन्न विधाओं की कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं। हर कलाकृति अपने आप में एक पूरी दुनिया समेटे हुए थी, जो दर्शकों को सोचने और महसूस करने पर मजबूर कर रही थी।

पूरे देश से जुटे 25 कलाकार, एक मंच पर

इस कला प्रदर्शनी की सबसे ख़ास बात यह रही कि इसमें पूरे भारत से 25 प्रतिभाशाली कलाकारों ने हिस्सा लिया। विशाल गौतम, सिद्धि गुप्ता, सुशांत मेहरा, आकांक्षा वर्मा, आरिफ़ क़ुरैशी, संगीता कुमार, विशाखा चौहान, मयूखी देवी, संजीव मौर्या, सुनील कुमार, इशिता जांगड़ा, स्मिता सिंह, तनिमा खोसला, वेद प्रकाश सिंह, सुहाना पाल, निशा गुप्ता, ओम प्रकाश गुप्ता, मेघना मेहरा, गरिमा, हर्ष शिवहरे, पूनम सैनी, वी. श्रुति देवी, फ़ातिमा और संदीप रजोरिया जैसे कलाकारों ने अपनी अनूठी कलाकृतियों से गैलरी में जान फूंक दी।

हर कलाकार ने अपनी शैली और विषय-वस्तु से दर्शकों का ध्यान खींचा। किसी ने प्रकृति की सुंदरता को तो किसी ने शहरी जीवन की जटिलताओं को अपने कैनवस पर उतारा। मूर्तियों में जीवन के संघर्ष की झलक थी तो इंस्टॉलेशन ने समकालीन मुद्दों पर गहरी चोट की।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ, गणमान्यों ने दी शुभकामनाएं

प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश, डिप्टी कमांडेंट, आईटीबीपी (गृह मंत्रालय, भारत सरकार) की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर रवींद्र साहू (जीएसटी अधिकारी), प्रमोद गोस्वामी (राजनीतिज्ञ एवं रियल एस्टेट कारोबारी), अनिरुद्ध प्रसाद चौरसिया (सामाजिक कार्यकर्ता), शाहीन हुसैन (सामाजिक कार्यकर्ता), डॉ. विक्रम चौरसिया (विचारक, मेंटर एवं सामाजिक कार्यकर्ता), असग़र ख़ान वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट, अरविंद सैनी, तथा नीब एनवायरो इक्विपमेंट्स सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

सभी अतिथियों ने कलाकारों को ढेरों शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं, कार्यक्रम की शोभा और संचालन की ज़िम्मेदारी मशहूर पत्रकार और एंकर कशफ़ी शमाईल ने निभाई, जिन्होंने अपनी प्रस्तुति से पूरी महफ़िल में समा बांध दिया।

हौज़ ख़ास गांव – कला और संस्कृति का संगम स्थल

ग़ौरतलब है कि हौज़ ख़ास गांव दिल्ली का एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र है, जहां आधुनिक कला दीर्घाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहरें भी मौजूद हैं। लोकायत आर्ट गैलरी इसी इलाक़े में स्थित एक जानी-मानी आर्ट गैलरी है, जो समय-समय पर देश-विदेश के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करती रहती है। ‘लम्हे’ प्रदर्शनी भी इसी परंपरा की एक कड़ी थी, जिसने हौज़ ख़ास की कला-संस्कृति को एक नई ऊंचाई दी।

कला प्रेमियों ने ख़ूब सराहा, भविष्य की उम्मीदें बुलंद

प्रदर्शनी के तीनों दिन कला प्रेमियों की भारी भीड़ देखने को मिली। युवा कलाकारों से लेकर अनुभवी चित्रकारों तक ने इस आयोजन की सराहना की। कई दर्शकों ने इसे ‘दिल्ली के इस सीज़न की बेहतरीन प्रदर्शनियों’ में से एक बताया। आयोजकों ने भी इस सफ़लता से उत्साहित होकर भविष्य में और भी बड़े स्तर पर कला आयोजन करने की बात कही।

कला के इन ‘लम्हों’ ने साबित कर दिया कि जब रचनात्मकता को सही मंच मिले, तो वह न सिर्फ़ दर्शकों का दिल जीतती है, बल्कि समाज को एक नई दिशा भी देती है।

—- भारत एक्सप्रेस



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