बदलते समय में ‘नाट्य परंपरा’ को बचाने की जंग! दिल्ली संस्कार भारती की गोष्ठी में जुटे के दिग्गज रंगकर्मी
Delhi Sanskar Bharati Theatre Seminar: दिल्ली संस्कार भारती के कला संकुल द्वारा आयोजित मासिक संगोष्ठी का आज 33, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली स्थित कला संकुल में सफल आयोजन हुआ. इस बार संगोष्ठी का विषय भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को नाट्य लेखन में बनाए रखने की चुनौतियां रहा.
सिनेमा का ‘माणिक’ और फ्रांस का गौरव: 1989 का वो दिन जब पूरी दुनिया ने माना सत्यजीत रे का लोहा
साल 1989 में भारतीय सिनेमा को वैश्विक गौरव मिला जब फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा मित्तेरां ने खुद कोलकाता आकर सत्यजीत रे को फ्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'लेजियोन ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया. सादगी और मानवीय संवेदनाओं के चितेरे रे ने 'अपू त्रयी' जैसी फिल्मों से विश्व सिनेमा की दिशा बदल दी थी.
अलविदा रघु राय! वो फोटोग्राफर जिसने तस्वीरों को ‘बोलना’ सिखाया, कैमरे से लिखी थी भारत की गाथा
भारतीय फोटोग्राफी के दिग्गज रघु राय का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. 1965 में अपना करियर शुरू करने वाले राय ने भोपाल गैस त्रासदी से लेकर मदर टेरेसा के पोर्ट्रेट तक, भारत की हर महत्वपूर्ण घटना और संवेदना को अपने कैमरे में कैद किया.
इतिहास के पन्नों से बाहर आईं ‘पादशाह बेगम’: राजीव कुमार के उपन्यास में जीवंत हुई जहांआरा की शक्ति और संवेदना
राजीव कुमार का उपन्यास 'जहांआरा: पादशाह बेगम' मुगल शहजादी जहांआरा के त्याग, विद्वत्ता और राजनीतिक कौशल की कहानी है। यह किताब चांदनी चौक की वास्तुकार और सूफी मत की अनुयायी जहांआरा के व्यक्तित्व को एक नए नारीवादी दृष्टिकोण से पेश करती है.
भारतीय इतिहास अध्ययन में एक नई बहस शुरू कर रही है प्राचीन भारत: संस्कृति के पांच अंतर्विरोध
Upinder Singh Book: उपिंदर सिंह की ‘प्राचीन भारत: संस्कृति के पाँच अन्तर्विरोध’ – प्राचीन इतिहास की नई दृष्टि न केवल प्राचीन भारत की समृद्ध विरासत को सामने लाती है, बल्कि उसकी जटिलता को भी बिना किसी सरलीकरण के रखती है.
‘भारत फिल्म फेस्टिवल’ का 8 अप्रैल से ग्रेटर नोएडा में आगाज़, CMD उपेन्द्र राय समेत शिरकत करेंगी ये दिग्गज हस्तियाँ
Bharat Film Festival Event: ग्रेटर नोएडा में 8 अप्रैल से 'भारत फिल्म फेस्टिवल' शुरू हो रहा है. इसमें भारत एक्सप्रेस के CMD उपेन्द्र राय 'भारत की बात सुनाता हूं' विषय पर अपने विचार व्यक्त करेंगे.
दिल्ली में कला का महाकुंभ! संस्कार भारती की मासिक संगोष्ठी में राष्ट्र निर्माण में कलाकारों की भूमिका पर चर्चा
Delhi Art Seminar: संस्कार भारती के केंद्रीय कार्यालय कला संकुल में आयोजित मासिक आर्ट संगोष्ठी में कला, समाज और विचारों पर खुलकर चर्चा हुई. मार्च महीने के इस सत्र में अलग-अलग तरह की कला और रचनात्मकता को लेकर दिलचस्प बातचीत देखने को मिली.
ममता कालिया ने हिन्दी कथा और संस्मरण लेखन को नई दृष्टि दी है
Sahitya Akademi Award Mamta Kalia: हिन्दी की वरिष्ठ लेखक ममता कालिया को उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिए जाने की घोषणा पर राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है.
नैनन में आन-बान: स्वरों की आलापचारी में डूबती एक आत्मीय यात्रा
यतीन्द्र मिश्र की नई पुस्तक 'नैनन में आन-बान' शास्त्रीय संगीत की शुष्क व्याख्या नहीं, बल्कि सुरों की एक आत्मीय यात्रा है. यह किताब 12 महान संगीतकारों के जीवन और उनकी गायकी के जरिए पाठक को रागों की दुनिया से जोड़ती है.
एनके गौड़ा: किताबों के प्रति जुनून से बनी देश की सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी, अब पद्मश्री से सम्मानित
साधारण बस कंडक्टर से ‘अक्षर योगी’ बने एनके गौड़ा की प्रेरक यात्रा बताती है कि जुनून और त्याग से ज्ञान का ऐसा खजाना खड़ा किया जा सकता है, जो समाज और आने वाली पीढ़ियों को रोशन करे.





