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Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
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सूडान का घटनाक्रम तेजी से बदल रही दुनिया की उन खतरनाक चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचता है जो अब बार बार हमारे सामने आकर खड़ी हो रही हैं।

अगर दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले देश का तमगा हमें कुछ दशक पहले मिला होता तो हो सकता है ये देश के लिए एक बड़ी चिंता का विषय होता।

तीन साल पहले राजस्थान में बीजेपी के ऑपरेशन लोट्स को विफल करने से पहले भी दूसरे राज्यों में कांग्रेस की सरकारें बचाने में गहलोत कांग्रेस में चाणक्य की भूमिका निभाते नजर आए हैं।

फिनलैंड को नाटो की सदस्यता देने से तमतमाया रूस अपनी सैन्य शक्ति को लगातार बढ़ा रहा है। ऐसे में फिनलैंड के बाद अगर यूक्रेन को भी नाटो की सदस्यता दी गई तो ये रूस को खुली चुनौती होगी जिसका अंजाम महाविनाश हो सकता है।

पंजाब फिर अस्सी वाले उसी दशक में न पहुंच जाए इसके लिए जरूरी है कि अमृतपाल के सरेंडर करने या उसकी गिरफ्तारी के बाद पारदर्शी जांच और अभियोजन सुनिश्चित कर जल्द-से-जल्द उसकी इस कथा का उपसंहार लिख दिया जाए।

चीन की चालबाजी का एक गौर करने वाला पक्ष ये भी है कि ‘सौ-सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली’ की तर्ज पर वो अब अपनी छवि सुधारने की जुगत भी लगा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के कुशल और दमदार नेतृत्व से वैश्विक स्तर पर आज भारत अपने देश और उसके नागरिकों की सुरक्षा के लिए बिना संकोच अपनी बात रखने में सक्षम है।

ऐसे में ‘2023 को भारत का साल’ बताने वाली अमेरिका की भविष्‍यवाणी सच साबित होती दिख रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करवाने के हमारे प्रयास इस सफर को और आसान कर सकते हैं।

कांग्रेस भी शायद जमीन की हकीकत को समझ रही है। रायपुर के अधिवेशन में उसने एक तरह से ये बात मान ली है कि गठजोड़ उसके लिए भी जरूरी है और गठजोड़ बनाए बिना चुनावी वैतरणी पार करने का उसका माद्दा नहीं बचा है।

भारत ने युद्ध पर शुरू से ही एक तटस्थ रुख रखा है और रूस की कार्रवाई की सार्वजनिक रूप से निंदा करने से भी परहेज किया है।