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नासिक का कपालेश्वर शिव मंदिर जहां शिवलिंग तो है पर नंदी क्यों गायब? दर्शन मात्र से मिलती है पापों से मुक्ति, जानें इस अद्भुत मंदिर का रहस्य

नासिक का कपालेश्वर शिव मंदिर जो अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है, जहां शिवलिंग के सामने नंदी की प्रतिमा नहीं मिलती.

Edited by Radha Priya

Ritu Divya


Kapaleshwar Shiva Mandir:महाराष्ट्र के नासिक में स्थित कपालेश्वर शिव मंदिर,पूरे ब्रह्मांड का एकमात्र ऐसा शिव मंदिर है जहां शिवलिंग के सामने नंदी देखने को नहीं मिलेगा.यहां दर्शन मात्र से ही सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है,और मन को शांति मिलती है.रहस्यों से भरा यह मंदिर आस्था और अद्भुत विशेषताओं का अनोखा संगम है, जहां हर शिवभक्त को एक बार जरूर जाना चाहिए.

भारत में हजारों शिव मंदिर हैं लेकिन महाराष्ट्र के नासिक में स्थित कपालेश्वर शिव मंदिर अपनी खास परंपरा और दिव्यता के कारण सबसे अलग है. यह पूरे ब्रह्मांड का एकमात्र ऐसा शिव मंदिर है जहां शिवलिंग के सामने नंदी महाराज की प्रतिमा नहीं है. इसका रहस्य पद्म पुराण में मिलता है.

पुराणों के अनुसार, भगवान ब्रह्मा के पांच मुख थे, चार मुख वेदों का उच्चारण करते थे परंतु पांचवां मुख ईर्ष्या और द्वेष के कारण अक्सर भगवान विष्णु और भगवान शिव की निंदा करते रहता था.

एक सभा में ब्रह्मा का पांचवां मुख हद से ज्यादा निंदनीय बातें करने लगा तो भगवान शिव ने क्रोध में आकर उसका सिर काट दिया. यह ब्राह्मण हत्या के समान था, जिसे हिन्दू धर्म में घोर पाप माना जाता है जिस कारण भगवान शिव अपराध बोध से भर गए.

भगवान शिव गहरे अपराधभाव से पीड़ित होकर पूरे भारत की यात्रा की. यात्रा-थकान के कारण उन्होंने नासिक के पंचवटी में देव शर्मा ब्राह्मण के घर विश्राम किया. उस स्थान पर उन्होंने नंदी और अपनी मां के बीच वार्तालाप सुना. नंदी ने मां से शिकायत की कि उसके स्वामी का व्यवहार अत्यंत कठोर है और वह उसे मार देगा, क्योंकि वह जानता था कि इस पाप का प्रायश्चित केवल पवित्र नदियों से हो सकता है.

नंदी को जब देव शर्मा गौशाला से ले जाने के लिए आए तब उसने उनपर अपने तीखे सींग से हमला कर दिया और इस पाप के कारण उसका रंग सफेद से काला पर गया. पाप को दुर करने के लिए वह रामकुंड में मिलती नदियां अरुणा, वरुणा और अदृश्य सरस्वती की ओर दौड़े और पवित्र नंदी से बाहर निकलकर उनका काला रंग पूरी तरह सफेद रंग में बदल चुका था और वह अपने पाप से पूरी तरह शुद्ध हो चुके थे.

चुपचाप सब देख रहे भगवान शिव ने गोदावरी के जल में स्नान करके,राम मंदिर में भगवान राम के दर्शन करने के बाद उन्होंने एक पहाड़ी पर शिवलिंग स्थापित किया और अपने पाप से मुक्ति पाने के लिए घोर तपस्या शुरू कर दी. इस भक्ति से खुश होकर भगवान विष्णु ने खुद, वहां स्थायी शिवलिंग की स्थापना की और उसका नाम कपालेश्वर (कपाल अर्थात सर काटने के पाप से मुक्त हुआ हो) रखा.

नंदी ने भगवान शिव को पाप से मुक्ति का रास्ता दिखाया था इसलिए वे नंदी को अपना गुरु और मार्गदर्शक के रुप में स्वीकार किये. गुरु के प्रति सम्मान के कारण नंदी कपालेश्वर मंदिर में शिवलिंग के सामने नहीं हैं. जो सामान्य परंपरा से अलग है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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