सतना/अमित: सतना के शिवराजपुर में चल रही बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा इन दिनों जबरदस्त चर्चा में है. लोग दूर-दूर से अपनी अर्जी लेकर आ रहे हैं, लेकिन इसी बीच एक ऐसा वाकया हुआ जिसने वहां मौजूद हजारों लोगों को हैरान कर दिया. इस बार बाबा की ‘दिव्य दृष्टि’ से ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी भी नहीं बच सका.
मन में था संशय, मंच से आई आवाज
धारकुंडी थाने में तैनात ASI सुरेंद्र कुमार इस कथा के दौरान पंडाल में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे. वर्दी में मुस्तैद सुरेंद्र कुमार के मन में रह-रहकर एक ही ख्याल आ रहा था कि क्या बाबा की नजर उन पर पड़ेगी? उन्होंने सोचा, “मैं तो यहां अपनी ड्यूटी पर हूं, इतनी भारी भीड़ में क्या बाबा मुझे पास बुलाएंगे? क्या मेरी बात उन तक पहुंच पाएगी?”
हैरानी की बात यह रही कि जैसे ही एएसआई के मन में यह सवाल उठा, मंच पर विराजमान धीरेंद्र शास्त्री ने भीड़ के बीच से सीधे उनकी तरफ इशारा किया और उन्हें पास बुला लिया. जैसे ही सुरेंद्र कुमार मंच पर पहुंचे, बाबा ने मुस्कुराते हुए वही बात दोहरा दी जो पुलिसकर्मी के दिमाग में चल रही थी. उन्होंने पूछा, “यही सोच रहे थे न कि हमें बुलाएंगे या नहीं?” यह सुनते ही एएसआई भावुक हो गए और बोले, “महाराज जी, आपने तो मेरी आत्मा की आवाज सुन ली.”
बिना बताए ही लिख दिया बेटी का दर्द
सुरेंद्र कुमार अपनी बेटी की सेहत को लेकर काफी परेशान थे. जैसे ही वह मंच पर पहुंचे, धीरेंद्र शास्त्री ने बिना उनके कुछ कहे ही पर्चा निकालना शुरू कर दिया. बाबा ने पर्चे पर साफ-साफ लिखा कि उनकी बेटी को अचानक चक्कर आने और ‘फिट’ (दौरे) पड़ने की समस्या है. उन्होंने बताया कि ब्रेन में थोड़ी दिक्कत की वजह से ऐसा हो रहा है, लेकिन घबराने की बात नहीं है. आशीर्वाद देते हुए बाबा ने कहा कि यह समस्या अब दोबारा नहीं होगी और बालाजी की कृपा से सब ठीक हो जाएगा.
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‘दवा भी और दुआ भी’
आमतौर पर चमत्कार की बातों के बीच धीरेंद्र शास्त्री ने एक बहुत ही व्यवहारिक सलाह भी दी. उन्होंने एएसआई से कहा कि वह बेटी के लिए मंत्र चिकित्सा तो करेंगे ही, लेकिन उन्हें डॉक्टर का इलाज भी साथ-साथ जारी रखना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति के साथ-साथ मेडिकल साइंस का सहारा लेना भी जरूरी है.
बाद में मीडिया से बात करते हुए एएसआई सुरेंद्र कुमार ने बताया कि बाबा ने पर्चे में जो कुछ भी लिखा, वह 100 प्रतिशत सच है. वर्दी में होने के बावजूद बाबा का उन्हें बुलाना और उनकी पारिवारिक परेशानी का सटीक जिक्र करना, उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था. इस घटना के बाद पूरे पंडाल में ‘जय श्री राम’ और ‘बालाजी महाराज’ के जयकारे गूंज उठे.
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-भारत एक्सप्रेस
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