'हिम्मत है तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बोलें अखिलेश', हाथरस में सीएम योगी का सपा सुप्रीमो पर बड़ा हमला
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या राम मंदिर को लेकर दिए बयान पर समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव को आड़े हाथों लिया. सीएम योगी ने अखिलेश का नाम लेकर कहा कि “वे अब अयोध्या की चिंता करना छोड़ दें, क्योंकि सपा ने हमेशा रामभक्तों का विरोध किया था, और उन पर गोलियां भी चलवाई थीं. आज अयोध्या त्रेतायुग जैसी भव्य हो गई है और करोड़ों रामभक्त वहां दर्शन करने जा रहे हैं तो आप (सपाइयों) के मुंह में पानी आ रहा है.”
सीएम योगी ने आगे कहा-
“अगर अखिलेश में हिम्मत है, तो वे अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए खुलकर अपनी बात रखें. वे कहें कि वहां भी राम मंदिर जैसा श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर बने.”
सीएम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है और अखिलेश ने सपा सरकार आने पर अयोध्या को एक धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करने का दावा किया था.
अखिलेश जी,
आप अयोध्या की चिंता मत करिए, पश्चाताप करिए। एक बार प्रभु श्री रामलला का दर्शन कर लीजिए। कम से कम इसी से सद्बुद्धि आएगी…
आइए, खुलकर बोलिए कि श्री राम जन्मभूमि मुक्ति के आंदोलन की तर्ज पर ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का भी अभियान चलना चाहिए… pic.twitter.com/eoZEY6ze2P
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 28, 2026
“रामभक्तों पर गोली चलाने वाले अयोध्या की चिंता न करें”
सीएम योगी ने अखिलेश यादव के दावों पर पलटवार करते हुए उनके अतीत की याद दिलाई. योगी ने कहा, “मैं अखिलेश से कहना चाहता हूं कि आप अयोध्या को क्या धार्मिक नगरी बनाएंगे. आप तो वो हैं जिनकी सरकार ने रामभक्तों पर गोलियां चलाई थीं.” उन्होंने सपा प्रमुख को नसीहत देते हुए कहा कि अखिलेश को अयोध्या की चिंता करने के बजाय अपने पुराने कृत्यों पर पश्चाताप करना चाहिए. उन्हें कम से कम एक बार जाकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन करने चाहिए, जिससे शायद उन्हें कुछ सद्बुद्धि आ सके. सीएम योगी ने साफ किया कि अयोध्या को किसी राजनीतिक दल के समर्थन की जरूरत नहीं है, क्योंकि रामभक्तों और पीएम मोदी के नेतृत्व में अयोध्या पहले ही अपनी वैश्विक पहचान वापस पा चुकी है.
मुल्ला-मौलवियों के दबाव में हैं अखिलेश यादव: CM योगी
सपा प्रमुख पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए सीएम योगी ने कहा कि अखिलेश कभी भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति की बात नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव यह बात इसलिए नहीं बोलेंगे क्योंकि वे मुल्ला और मौलवियों के दबाव में हैं.” योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का एजेंडा केवल तुष्टीकरण तक सीमित है. उनके पास उत्तर प्रदेश के विकास या सांस्कृतिक धरोहरों के सम्मान के लिए कोई ठोस योजना नहीं है. सीएम योगी ने यह भी याद दिलाया कि सपा के शासनकाल में थानों और जेलों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने पर रोक लगा दी गई थी और कांवड़ यात्रा पर भी प्रतिबंध झेलना पड़ता था.
जनता ने समाजवादी पार्टी की साइकिल को किया ‘पंक्चर’
अपने भाषण के दौरान सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के चुनाव चिह्न ‘साइकिल’ पर भी जमकर तंज कसा. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की समझदार जनता ने अब सपा की साइकिल को पूरी तरह से ‘पंक्चर’ कर दिया है. सीएम ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर राज्य में फिर कभी साइकिल चली, तो वह केवल दंगे करवाएगी. साइकिल का चलना महिलाओं की सुरक्षा को खतरे में डालेगा और व्यापारियों को लूटने का काम करेगा. उन्होंने कहा कि साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू और माफिया राज ही इस राज्य की पहचान बन चुके थे, लेकिन आज भाजपा की डबल इंजन सरकार में प्रदेश सुरक्षा और विकास का एक बेहतरीन मॉडल बन चुका है.
श्रीकृष्ण जन्मभूमि: आक्रांताओं का कब्जा और कानूनी पेंच
मथुरा के इतिहास पर नजर डालें, तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि का विवाद सदियों पुराना है. ऐतिहासिक दस्तावेजों और हिंदू पक्ष के दावों के अनुसार, इस्लामी आक्रांता औरंगजेब ने साल 1670 में मथुरा में श्रीकृष्ण के भव्य मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था. मंदिर को नष्ट करने के बाद मुगल शासक ने उसी कटरा केशवदेव परिसर के एक हिस्से पर जबरन शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण करवा दिया गया था. अब हिंदू पक्ष इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने और अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए पूरी तरह से कानूनी राह पर आगे बढ़ रहा है. हिंदू संगठनों की मांग है कि पूरी 13.37 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को वापस सौंपी जाए.
फिलहाल, यह पूरा विवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सामने विचाराधीन है. हिंदू पक्ष ने अदालत में याचिकाएं दायर कर शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की मांग की है, ताकि वहां मौजूद प्राचीन हिंदू धार्मिक प्रतीकों को सामने लाया जा सके. हालांकि, मुस्लिम पक्ष (शाही ईदगाह कमेटी) ‘प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ का हवाला देकर इन याचिकाओं का विरोध कर रहा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले की पोषणीयता (Maintainability) पर लगातार सुनवाई कर रहा है. कानून के जानकारों का मानना है कि अदालत का जो भी फैसला आएगा, वह देश की सांस्कृतिक और कानूनी दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा.
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