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सावन बीता अब जानें पूरे साल किस महीने में होगी किस भगवान की पूजा और क्यों?

Hindu Calendar: हिंदू सनातन धर्म ईश्वर और प्रकृति के लिए समर्पित है. इस कारण यहां हर महीने मौसम के हिसाब से अगल-अलग देवताओं की पूजा होती है. आइये जानें किस महीने में किस देवता की पूजा होती है.

Hindu Calendar every month puja

महीनेवार जाने कब किस देव की पूजा का महत्व

Hindu Calendar: अभी तक सावन का महीना चल रहा था तो भक्त जमकर भगवान शिव को प्रसन्न करने में लगे थे. हालांकि, हिंदू धर्म में साल के बारह महीने अलग-अलग देवताओं से जुड़े हुए माने जाते हैं. हर महीने के एक विशेष देवता होते हैं, जिनकी पूजा करने से उस समय विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. आइये जानें कौन सा महीने किस किन भगवान के लिए समर्पित होता है.

चैत्र मास (मार्च से अप्रैल)

चैत्र महीने को साल की धार्मिक शुरुआत माना जाता है, क्योंकि इसी महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था. इस महीने श्रीराम और भगवान विष्णु की पूजा से घर में सुख-शांति आती है और परिवार में एकता बनी रहती है. यह महीना भगवान विष्णु (राम अवतार), सूर्यदेव, हनुमानजी के लिए समर्पित है.

वैशाख मास (अप्रैल से मई)

वैशाख में गंगा दशहरा आता है, जो राजा भगीरथ के पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए गंगा के पृथ्वी पर उतरने की कथा से जुड़ा है. इस महीने गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में पवित्रता आती है. यह महीना माधव रूप में विष्णु, मां गंगा, चित्रगुप्त के लिए समर्पित है.

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ज्येष्ठ मास (मई से जून)

ज्येष्ठ महीने में सूर्यदेव की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि इस महीने धूप और गर्मी अपने चरम पर होती है. महाभारत की कथा के अनुसार, सूर्यदेव ने ज्येष्ठ महीने में कर्ण को अपना पुत्र स्वीकार किया और उसे दिव्य कवच-कुंडल प्रदान किए थे. सूर्य के अलावा यह महीना शनिदेव, देवी गायत्री के लिए समर्पित है.

आषाढ़ मास (जून से जुलाई)

आषाढ़ में पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा होती है, जो भगवान कृष्ण, बलराम और सुभद्रा के अपनी मौसी के घर जाने की कथा से जुड़ी है. इस महीने भगवान जगन्नाथ के दर्शन और सेवा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में नई ऊर्जा आती है.

श्रावण मास (जुलाई से अगस्त)

श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, जो समुद्र मंथन में हलाहल विष पीने की कथा से जुड़ा है. इस महीने शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

भाद्रपद (भादो) मास (अगस्त से सितंबर)

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है, जो माता पार्वती द्वारा गणेश को बनाने और भगवान शिव द्वारा उन्हें पुनर्जीवित करने की कथा से जुड़ी है. इस महीने गणेश जी की पूजा से बाधाएं दूर होती हैं.

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आश्विन मास (सितंबर से अक्टूबर)

आश्विन में नवरात्र का पर्व आता है, जो देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने की कथा से जुड़ा है. नवरात्र के नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जो शक्ति और भक्ति का प्रतीक है.

कार्तिक मास (अक्टूबर से नवंबर)

कार्तिक माह में तुलसी और शालिग्राम का विवाह होता है, जो लक्ष्मीजी के तुलसी के रूप में जन्म लेने और भगवान विष्णु के साथ विवाह की कथा से जुड़ा है. इस महीने दीपदान और तुलसी पूजन करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और दरिद्रता दूर होती है.

अगहन, मार्गशीर्ष (अग्रायण) मास (नवंबर से दिसंबर)

मार्गशीर्ष माह में गीता जयंती मनाई जाती है, जो भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता का उपदेश देने की कथा से जुड़ी है. गीता पाठ करने से जीवन में सही मार्ग मिलता है. इस कारण यह महीना भगवान कृष्ण के लिए समर्पित है.

पौष मास (दिसंबर से जनवरी)

पौष संक्रांति के समय सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ते हैं, जो भीष्म पितामह के अपने शरीर को सूर्य के उत्तरायण होने तक छोड़ने की कथा से जुड़ा है. इस महीने सूर्य पूजा, अन्नदान और तिल के सेवन से स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है. यह महीना सूर्यदेव, भगवान विष्णु के लिए समर्पित है.

माघ मास (जनवरी से फरवरी)

माघ में प्रयागराज का माघ मेला प्रसिद्ध है, जो देवताओं के पवित्र संगम में स्नान कर अपने पापों से मुक्ति पाने की कथा से जुड़ा है. इस महीने गंगा, यमुना और सरस्वती में स्नान और भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह महीना भगवान विष्णु, गंगा स्नान, सूर्यदेव, श्री हरि विष्णु के लिए समर्पित है.

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फाल्गुन मास (फरवरी से मार्च)

फाल्गुन में होली का पर्व आता है, जो भगवान कृष्ण द्वारा राधा और गोपियों के साथ रंग खेलने की कथा से जुड़ा है. इस महीने आनंद, उत्सव और मेल-जोल का समय होता है और श्रीकृष्ण की भक्ति से जीवन में प्रेम और उल्लास भरता है. यह महीना भगवान कृष्ण, भगवान नृसिंह के लिए समर्पित है.

इन महीनों का महत्व

इन महीनों का महत्व सिर्फ पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह समय और ऋतु के साथ देवताओं के स्मरण का एक सुंदर तरीका भी है. हर महीने के अपने विशेष देवता और उन



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