कब और कैसे हुई रक्षाबंधन की शुरुआत?(Image- AI)
Raksha Bandhan History And Origin: आज 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन देशभर में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है. यह पर्व सिर्फ भाई-बहन के स्नेह का पर्व भर नहीं है, इसका इतिहास हजारों साल पुरानी लोगों की कहानियों और स्मृतियों में समाया हुआ है. इस पर्व को लेकर कई पौराणिक, ऐतिहासिक किवदंतियां हैं, जो इस पर्व के महत्व और इतिहास की परत खोलती हैं.
रक्षाबंधन की उत्पत्ति कैसे हुई इसकी सटीक जानकारी तो नहीं है, लेकिन यह त्योहार हजारों सालों से भारतीय परंपरा का हिस्सा है. इस पर्व में बांधा जाने वाला रक्षा-सूत्र का जिक्र वैदिक और पौराणिक साहित्य में मिलता है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक इंद्राणी ने देवराज इंद्र को असुरों से युद्ध से पहले रक्षा-सूत्र बांधने का जिक्र है. इसके अलावा पुराणों में राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा और द्रौपदी-कृष्ण प्रसंग में भी रक्षा-सूत्र बांधने का उल्लेख मिलता है. ये सभी कथाएं भारत के धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा हैं.
पौराणिक कथाओं में रक्षा-सूत्र बांधने का उल्लेख जरूर मिलता है, लेकिन इसे ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं माना जा सकता है. भारतीय इतिहास में रक्षा बंधन मनाने के संबंध में कई ऐसी किवदंतियां हैं जो रक्षाबंधन के इतिहास पर रौशनी डालती है.
कर्णावती-हुमायूं का इतिहास
इतिहास में सबसे ज्यादा सुनाई जाने वाली कहानी 1535 में मेवाड़ की रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूं का है. जिसमें बताया जाता है कि गुजरात के शासक बहादुर शाह के हमले से चित्तौड़ को बचाने के लिए मेवाड़ की रानी कर्णावती ने मुगल शासक हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी थी. किवदंती के मुताबिक हुमायूं समय पर चित्तौड़ नहीं पहुंच सका और 8 मार्च 1535 को रानी कर्णावती ने जौहर कर लिया. इस कहानी को ब्रिटिश इतिहासकार जेम्स टॉड ने अपनी किताब ‘Annals and Antiquities of Rajasthan’ में दर्ज किया है.
सिकंदर-पोरस की कहानी
रक्षाबंधन से संबंधित एक और प्रचलित कथा है कि सिकंदर की पत्नी रोक्सेना ने राजा पोरस को राखी भेजकर सिकंदर की जान बख्शने का वचन लिया था. बताया जाता है कि पोरस ने रानी रोक्सेन को दिया हुआ अपना वचन निभाया. उन्होंने युद्ध के दौरान सिकंदर पर एक भी जानलेवा वार नहीं किया, जिसकी वजह से पोरस की हार हुई. हालांकि इतिहासकार इस कहानी को गलत बताते हुए इसे लोककथा बताया है.
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दरअसल रक्षाबंधन से जुड़ी ज्यादातर ऐतिहासिक कहानियां चाहे कर्णावती-हुमायूं की हो या सिकंदर-पोरस की ये सभी भारतीय जनमानस के लोककथाओं में बसी हुई हैं. इस पर्व पर बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उससे अपनी रक्षा का वचन लेती हैं. इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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