Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

वाराणसी के अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस पर खुलता है ‘खजाना’, मिलती है दुर्लभ अठन्नी और धान का लावा

वाराणसी स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर में हर साल धनतेरस से अन्नकूट तक चार दिन तक ‘खजाना’ बांटने की अनोखी परंपरा निभाई जाती है. इस दौरान भक्तों को चलन से बाहर हो चुकी अठन्नी और धान का लावा दिया जाता है, जिसे घर में रखने से सुख-समृद्धि बनी रहने की मान्यता है.

देशभर में जहां दीपावली के समय धन की देवी लक्ष्मी की पूजा होती है, वहीं वाराणसी में स्थित मां अन्नपूर्णा देवी का मंदिर एक अलग ही परंपरा निभाता है. यहां हर साल धनतेरस से शुरू होकर अन्नकूट तक चार दिनों तक एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें मां अन्नपूर्णा का ‘खजाना’ भक्तों में वितरित किया जाता है.

गंगा के पश्चिमी घाट पर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के दक्षिण में मां अन्नपूर्णा देवी का यह मंदिर स्थापित है. मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा अन्न और धन की देवी हैं और वे अपने भक्तों को कभी भूखा नहीं रखतीं. इस मंदिर में धनतेरस के दिन मां के खजाने के रूप में विशेष प्रसाद वितरित किया जाता है, जिसमें चांदी जैसी दिखने वाली पुरानी अठन्नी और धान का लावा दिया जाता है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है.

मंदिर में उमड़ती है भक्तों की भीड़

धार्मिक मान्यता है कि इस अठन्नी और धान के लावे को घर या व्यापारिक प्रतिष्ठान में रखने से दरिद्रता नहीं आती और सुख-समृद्धि बनी रहती है. यही कारण है कि देशभर से श्रद्धालु इस खजाने को प्राप्त करने के लिए वाराणसी पहुंचते हैं और घंटों लंबी कतारों में लगते हैं.

मां अन्नपूर्णा के स्वर्णिम स्वरूप के दर्शन भी सिर्फ साल में चार दिन धनतेरस से अन्नकूट तक के लिए ही होते हैं. इस दौरान भक्तों की भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ती है.

हर साल कितना बंटता है खजाना?

मंदिर से जुड़े महंत परिवार को भी इस परंपरा की शुरुआत की सटीक तिथि मालूम नहीं होती है लेकिन पीढ़ियों से यह परंपरा निभाई जा रही है. यह भी एक रहस्य ही है कि हर साल कितनी राशि का यह ‘खजाना’ बांटा जाता है.

पौराणिक कथा के अनुसार, काशी के राजा दिवोदास ने किसी भी देवी-देवता के नगर में प्रवेश पर रोक लगा दी थी. तब मां अन्नपूर्णा ने उनके अहंकार को तोड़ने के लिए काशी में अकाल डाल दिया. अंततः मां की कृपा से काशी को अन्न मिला और तब से यह परंपरा चली आ रही है.

ये भी पढ़ें- Diwali 2025: चमक-दमक में ना बहें, वरना खाली हो जाएगी जेब… जानिए धनतेरस पर कैसे करें खर्च

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital