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बारिश के बीच अवंतिका में गूंजा हर-हर महादेव; इस बार नई साथी ‘सुमा’ संग नगर भ्रमण पर निकले बाबा महाकाल; देखें VIDEO

Mahakal Sawari Ujjain: सावन के दूसरे सोमवार को उज्जैन में रिमझिम बारिश के बीच भगवान महाकाल की दूसरी राजसी सवारी निकली. पालकी में चंद्रमौलेश्वर और मादा हाथी सुमा पर मनमहेश स्वरूप के दर्शन पाकर भक्त निहाल हो उठे. रामघाट पर शिप्रा जल से अभिषेक के बाद गोपाल मंदिर में पूजन हुआ और रात 8 बजे पालकी पुनः मंदिर लौटी.

UJJAIN-MAHAKAL

Mahakal Sawari Ujjain:मनोज भटनागर/उज्जैन:  सावन के दूसरे सोमवार को अवंतिकानाथ भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकले. रिमझिम बारिश और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच राजा महाकाल की दूसरी भव्य सवारी पारंपरिक गरिमा और राजसी ठाठ-बाठ के साथ महाकालेश्वर मंदिर से रवाना हुई.

रिमझिम बारिश और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच सावन के दूसरे सोमवार को उज्जैन में भगवान महाकाल की दूसरी भव्य सवारी निकली. मुख्य द्वार पर गार्ड ऑफ ऑनर के बाद राजा महाकाल पालकी में चंद्रमौलेश्वर और 65 वर्षीय मादा हाथी ‘सुमा’ पर मनमहेश रूप में नगर भ्रमण पर निकले. रामघाट पर शिप्रा जल से जलाभिषेक और गोपाल मंदिर में पूजन के बाद, भक्तिमय माहौल में सवारी रात 8 बजे वापस महाकाल मंदिर लौटी.

मनमहेश स्वरूप ने श्रद्धालुओं को अलौकिक दर्शन दिए (Shri Mahakaleshwar Temple)

सावन के दूसरे सोमवार को महाकाल नगरी पूरी तरह शिवमय हो उठी. इस भव्य यात्रा के दौरान पालकी में विराजे चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर सवार मनमहेश स्वरूप ने श्रद्धालुओं को अलौकिक दर्शन दिए, जिससे उज्जैन की सड़कों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. इस बार की सवारी में एक विशेष बदलाव देखने को मिला. पिछले 46 वर्षों से सवारी का हिस्सा रहे हाथी ‘श्यामू’ के अस्वस्थ होने के कारण 65 वर्षीय प्रशिक्षित मादा हाथी ‘सुमा’ को शामिल किया गया. अपने मालिक महेश दास निर्मोही के साथ सुमा ने सभी आवश्यक परीक्षण पास कर इस राजसी यात्रा में अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई.

एक झलक के लिए भक्त रास्तों पर पलक-पावड़े बिछाए खड़े रहे (Sawan Second Monday)

सवारी की शुरुआत शाम ठीक 4:00 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से हुई. मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल, पुलिस बैंड, घुड़सवार दल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में चांदी की पालकी में विराजमान भगवान चंद्रमौलेश्वर को औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (सलामी) दिया गया. इसके बाद ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक धुन के साथ राजसी यात्रा आगे बढ़ी. लगभग आठ किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर पुलिस जवानों की टुकड़ी, भजन मंडलियां और पारंपरिक वेशभूषा में सजे आदिवासी दलों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं. रिमझिम फुहारों के बीच अपने राजा की एक झलक पाने के लिए भक्त रास्तों पर पलक-पावड़े बिछाए खड़े रहे.

8:00 बजे सवारी पुनः महाकाल मंदिर लौटी (Ramghat Kshipra River)

मंदिर परिसर से शुरू होकर सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बख्शी बाजार और कहरवाड़ी होते हुए मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के रामघाट पहुंची. यहां मां शिप्रा के पवित्र जल से भगवान का विधि-विधान से जलाभिषेक और पूजन-अर्चन किया गया. इसके पश्चात सवारी गणगौर दरवाजा, ढाबा रोड, सत्यनारायण मंदिर, छत्री चौक होते हुए प्रसिद्ध गोपाल मंदिर पहुंची, जहां सिंधिया स्टेट द्वारा पारंपरिक पूजन संपन्न हुआ. रास्तेभर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर पालकी का स्वागत किया. भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समिति ने फेसबुक लाइव और चलित रथों पर LED स्क्रीन के माध्यम से सीधा प्रसारण भी दिखाया. पटनी बाजार होते हुए रात लगभग 8:00 बजे सवारी पुनः महाकाल मंदिर लौट आई.

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-भारत एक्सप्रेस



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