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महाशिवरात्रि पर क्यों जरूरी है पूरी रात जागरण और चार प्रहर का अभिषेक? जानिए कैसे मन और मस्तिष्क को मिलती है नई ऊर्जा

महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा केवल धार्मिक विधि नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धिकरण का जरिया है. जानिए यह पूजा कैसे देती है शांति.

Mahashivratri Chaar Prahar Puja Significance Spiritual Mind Purification

Mahashivratri Chaar Prahar Puja Vidhi (AI Image)

Mahashivratri Chaar Prahar Puja Vidhi: महाशिवरात्रि केवल भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह खुद के भीतर उतरने और मानसिक शांति पाने का एक पावन अवसर भी है. आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवरात्रि की रात ब्रह्मांड में अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है. यही वजह है कि महाशिवरात्रि की रात पूरी श्रद्धा से की जाने वाली ‘चार प्रहर की पूजा’ को मनुष्य के भीतर चलने वाली अशांति से शांति और अंधकार से प्रकाश की ओर आध्यात्मिक यात्रा माना गया है.

चार प्रहर की पूजा

हिंदू धर्म परंपरा में महाशिवरात्रि की पूरी रात को चार प्रहरों में बांटकर भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है. हर प्रहर में शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और जल से अभिषेक किया जाता है, बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप होता है. अगर इसे आध्यात्मिक और मानसिक दृष्टिकोण से समझें, तो यह पूजा चार चरणों में काम करती है:

पहला प्रहर (आत्मनिरीक्षण): यह चरण मन की अशांति और चिंताओं को पहचानने का प्रतीक है. दिनभर की भागदौड़ के बाद जब व्यक्ति शिव के सामने बैठता है, तो वह पहली बार अपने भीतर झांकता है.

दूसरा प्रहर (समर्पण): दूसरे प्रहर में साधक अपने नकारात्मक विचारों, तनाव और भावनात्मक बोझ को शिव चरणों में अर्पित करता है. जैसे शिवलिंग पर जल चढ़ता है, वैसे ही व्यक्ति अपना अहंकार बहा देता है.

तीसरा प्रहर (साधना व ध्यान): यह प्रहर एकाग्रता से जुड़ा है. मंत्र जाप और ध्यान के जरिए मन को बाहरी शोर से हटाकर भीतर की आवाज सुनने पर केंद्रित किया जाता है.

चौथा प्रहर (आत्मबोध व नई ऊर्जा): जैसे-जैसे रात का अंधेरा छंटता है और सुबह की पहली किरण आती है, ठीक वैसे ही साधक के भीतर एक नई चेतना और सकारात्मकता का उदय होता है.

क्यों खास है महाशिवरात्रि की रात का जागरण?

शास्त्रों में माना गया है कि महाशिवरात्रि की रात जागकर शिव का ध्यान करने से व्यक्ति अपनी चेतना को जागृत करता है. जब मनुष्य कुछ समय के लिए दुनियावी चिंताओं, इच्छाओं और अहंकार से दूर होकर ठहरता है, तो यही ठहराव उसके मन और मस्तिष्क का सबसे बड़ा शुद्धिकरण बन जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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