Sawan Shivratri 2026: सावन का महीना आते ही शिव मंदिरों में हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई देने लगते हैं. भोलेनाथ के भक्त इस पूरे महीने श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करते हैं, लेकिन सावन शिवरात्रि का दिन अपने आप में खास माना जाता है. साल 2026 में सावन शिवरात्रि का व्रत 11 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा. इस दिन भक्त उपवास रखने के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और रात में चार प्रहर तक पूजा करने की परंपरा निभाते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सावन शिवरात्रि पर सच्चे मन से महादेव की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है. खास बात यह है कि इस दिन सिर्फ सुबह या शाम की पूजा ही महत्वपूर्ण नहीं मानी जाती, बल्कि रात में होने वाली शिव आराधना का भी विशेष महत्व है.
घर पर कैसे करें सावन शिवरात्रि की पूजा?
अगर किसी वजह से आप मंदिर नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर भी विधि-विधान और श्रद्धा के साथ शिव पूजा कर सकते हैं. इसके लिए बहुत ज्यादा सामान जुटाने की जरूरत नहीं है. पूजा की जगह साफ रखें और जरूरी सामग्री पहले से तैयार कर लें.
सुबह स्नान करने के बाद सबसे पहले घर के पूजा स्थान की सफाई करें. शाम को पूजा से पहले एक बार फिर जगह को साफ कर लेना अच्छा माना जाता है. साफ चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर या शिवलिंग स्थापित करें. अगर घर में पहले से शिवलिंग है तो उसे साफ पानी से धोकर स्वच्छ स्थान पर रखें.
पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के ध्यान से करें. इसके बाद दीपक और धूप जलाएं और भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें. अपनी मनोकामना के साथ यह भाव रखें कि पूजा पूरी श्रद्धा और शांत मन से करेंगे.
जलाभिषेक से शुरू करें शिव पूजा
अब शिवलिंग पर पहले साफ पानी और फिर गंगाजल चढ़ाएं. इसके बाद परंपरा के अनुसार दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक किया जा सकता है. हालांकि, अगर घर पर इतनी सारी सामग्री उपलब्ध नहीं है तो सिर्फ जल या गंगाजल से अभिषेक करके भी पूजा की जा सकती है.
अभिषेक के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते रहें. कोशिश करें कि पूजा के समय आपका ध्यान दूसरी बातों में न भटके.
अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन और अक्षत चढ़ाएं. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और शमी के पत्ते अर्पित किए जा सकते हैं. मान्यता है कि बेलपत्र भगवान शिव को बेहद प्रिय है, इसलिए सावन शिवरात्रि की पूजा में इसका खास स्थान है. बेलपत्र साफ और साबुत चढ़ाना बेहतर माना जाता है.
महादेव को ऋतु के फल, मिठाई या पंचमेवा का भोग लगाया जा सकता है. इसके बाद धूप और दीप से भगवान शिव की आरती करें. परिवार के सदस्य साथ बैठकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर सकते हैं. शिव चालीसा या भगवान शिव से जुड़े स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है.
रात के चार प्रहर क्यों हैं खास?
सावन शिवरात्रि की पूजा में रात के चार प्रहर का विशेष महत्व बताया गया है. जो भक्त पूरी रात पूजा करना चाहते हैं, वे हर प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं और बेलपत्र व फूल अर्पित कर सकते हैं.
परंपरा के अनुसार पहले प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे प्रहर में शहद से अभिषेक किया जाता है. हर चरण में ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप और भगवान शिव का ध्यान किया जाता है.
हालांकि हर व्यक्ति के लिए पूरी रात जागना या चारों प्रहर पूजा करना संभव नहीं होता. ऐसी स्थिति में अपनी सुविधा के अनुसार रात में एक बार भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है. खास तौर पर निशिता काल में की जाने वाली शिव पूजा को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है.
सावन शिवरात्रि 2026: चारों प्रहर का समय
दी गई समय-सारणी के अनुसार 2026 में शिवरात्रि की रात के चार प्रहर इस तरह रहेंगे:
- पहला प्रहर: शाम 7:09 बजे से रात 9:56 बजे तक. इस दौरान दूध से अभिषेक करने की परंपरा है.
- दूसरा प्रहर: रात 9:56 बजे से 12:44 बजे तक. इस समय दही से अभिषेक किया जा सकता है.
- तीसरा प्रहर: रात 12:44 बजे से तड़के 3:31 बजे तक. इसी दौरान निशिता काल भी आएगा. विशेष निशिता मुहूर्त रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक बताया गया है. इस दौरान घी से अभिषेक करने की परंपरा है.
- चौथा प्रहर: तड़के 3:31 बजे से सुबह 6:19 बजे तक. इस प्रहर में शहद से अभिषेक किया जाता है.
धार्मिक मान्यता है कि चारों प्रहर भगवान शिव की पूजा करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. लेकिन अगर किसी कारण से चारों प्रहर पूजा संभव न हो तो निशिता काल में मुख्य पूजा की जा सकती है.
व्रत में किन बातों का रखें ध्यान?
सावन शिवरात्रि का व्रत सिर्फ खाना न खाने तक सीमित नहीं माना जाता. इस दिन मन और व्यवहार की शुद्धता पर भी जोर दिया जाता है. व्रत रखने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवनशैली अपनाने, क्रोध से बचने और किसी के प्रति मन में द्वेष न रखने की कोशिश करनी चाहिए. धार्मिक मान्यताओं में ब्रह्मचर्य के पालन का भी उल्लेख मिलता है.
खान-पान की बात करें तो व्रत में फलाहार किया जाता है. पानी, दूध और फल जैसे सेब या केला लिए जा सकते हैं. सामान्य नमक, गेहूं, चावल, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है. रात में जागकर भगवान शिव का ध्यान, मंत्र जाप और भजन करना भी इस व्रत की परंपरा का हिस्सा माना जाता है.
12 अगस्त को खुलेगा व्रत
11 अगस्त को सावन शिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्त 12 अगस्त 2026, बुधवार को सुबह 5:49 बजे के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं. व्रत खोलने से पहले स्नान करके भगवान शिव की सामान्य पूजा करना शुभ माना जाता है.
इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सात्विक भोजन से व्रत खोला जा सकता है. साबूदाना, कुट्टू के आटे से बने व्यंजन या अन्य फलाहारी भोजन लिए जा सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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