नई दिल्ली एक बार फिर एक भव्य आध्यात्मिक आयोजन का गवाह बनने वाली है. 17 से 25 जनवरी 2026 तक भारत मंडपम के मल्टीपर्पज़ हॉल लेवल 3 में पूज्य मोरारी बापू की नौ दिन की रामकथा होने जा रही है. इतिहास में पहली बार यह आयोजन जैन आचार्य लोकेश जी द्वारा कराया जा रहा है. यही वजह है कि यह कार्यक्रम केवल कथा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सनातन एकता के महोत्सव के रूप में भी देखा जा रहा है.
अहिंसा विश्व भारती और वर्ल्ड पीस सेंटर के संस्थापक आचार्य लोकश जी, डॉ. आलोक द्रोलिया और श्री प्रदीप जिंदल ने बताया कि कुछ समय पहले वर्ल्ड पीस सेंटर के उद्घाटन समारोह में मोरारी बापू ने स्वयं इस रामकथा का संकल्प लिया था. उन्होंने कहा था कि विश्व शांति के मिशन के लिए रामकथा सबसे प्रभावी माध्यम है, क्योंकि भगवान राम के जीवन से हमें संयम, करुणा, मर्यादा और न्याय का रास्ता मिलता है.
भगवान राम भारतीय संस्कृति के केंद्र में हैं. उनके जीवन से हर वर्ग, हर उम्र और हर युग के लोग सीख लेते हैं. यही कारण है कि रामकथा केवल आध्यात्मिक कार्यक्रम नहीं होती, बल्कि समाज को जोड़ने वाली प्रेरणा भी बन जाती है.
इस आयोजन में देश भर के संत, महंत और आध्यात्मिक गुरु शामिल होंगे. प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति सहित कई वरिष्ठ नेता और समाजसेवी भी इस कार्यक्रम में आने का आमंत्रण पा चुके हैं. बताया जा रहा है कि हजारों श्रद्धालु भारत और विदेशों से दिल्ली पहुंचेंगे. भारत मंडपम पहली बार इतने विशाल आध्यात्मिक समागम का केन्द्र बनेगा.
बता दें कि, जैन आचार्य डॉ. लोकेश जी दुनिया में शांति का संदेश फैलाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. वे अहिंसा विश्व भारती और वर्ल्ड पीस सेंटर मिशन को बहुत सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहे हैं. उनकी अगुवाई में 9 दिन की ऐतिहासिक रामकथा का सफल आयोजन तय हुआ है, जिसे विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु पूज्य मोरारी बापू प्रस्तुत करेंगे.
यह भव्य कार्यक्रम 17 से 25 जनवरी 2026 तक आयोजित होगा. नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में इस विशाल आध्यात्मिक समारोह का आयोजन किया जा रहा है.
आचार्य लोकेश जी हमेशा से सभी धर्मों और समुदायों को जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं. उनका मानना है कि सनातन संस्कृति दुनिया को शांति का सही रास्ता दिखा सकती है. आज पूरी दुनिया जिन चुनौतियों से गुजर रही है, उनका हल भी यही संस्कृति दे सकती है.
हाल ही में आचार्य लोकेश जी ने भारत मंडपम में ही आयोजित सनातन संत सम्मेलन 2025 में भी यही बात रखी. उन्होंने सभी संतों से कहा कि सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित करना आज समय की सबसे बड़ी जरूरत है. कार्यक्रम में शामिल सभी संतों ने माना कि सनातन परंपरा ही विश्व कल्याण का आधार है.
एकता का संदेश
आचार्य लोकेश जी राष्ट्रीय और धार्मिक एकता के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं. वे सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2025 से भी जुड़े. यह पदयात्रा पंडित धीरेंद्र शास्त्री की अगुवाई में दिल्ली से शुरू होकर वृंदावन तक 160 किलोमीटर चली. आचार्य लोकेश जी ने इस यात्रा को पूरा सहयोग दिया, जिसके लिए बागेश्वर धाम के बाबा ने उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित भी किया.
इसके साथ ही आचार्य लोकेश जी अंतरधार्मिक सद्भाव को भी बहुत महत्व देते हैं. उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ पर आयोजित अंतरधार्मिक सम्मेलन में भी हिस्सा लिया. इसमें सिख, जैन, हिंदू और अन्य धर्मों के नेता शामिल थे. गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रेरणा देता है.
आचार्य लोकेश जी एक सम्मानित सामाजिक सुधारक और अंतरराष्ट्रीय वक्ता हैं. उनका जीवन सामाजिक सद्भाव, अहिंसा और सहयोग को बढ़ावा देने में समर्पित है. उनकी संस्था अहिंसा विश्व भारती समाज और आध्यात्मिक जीवन में बड़े बदलाव ला रही है. वर्ल्ड पीस सेंटर का उद्देश्य मानवता को नैतिक मूल्यों के रास्ते पर ले जाना है.
आज दुनिया को आध्यात्मिक नेताओं की सबसे ज्यादा जरूरत है, ताकि वे समाज को सही दिशा दे सकें. आने वाली रामकथा इसी संदेश को और मजबूत करेगी. यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि दुनिया को एकजुट करने का बड़ा प्रयास भी साबित होगा. यह हमें याद दिलाता है कि हमें सत्य, करुणा और मानवता के रास्ते पर चलना ही होगा.
यह रामकथा एक शांत, एकजुट और बेहतर दुनिया की ओर एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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