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Navratri Day 4: आज की जाएगी मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना, जानें माता रानी से जुड़ी पौराणिक कथा

नवरात्रि 2025 का छठा दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित है. इन्हें ज्ञान, शक्ति और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है. मां स्कंदमाता की पूजा से भक्त सभी दुखों से मुक्त होकर जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त करते हैं.

Navratri Day 4

Navratri Day 4:

Navratri Day 4: नवरात्रि 2025 का छठा दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित है. इन्हें ज्ञान, शक्ति और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि के इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को संतान सुख, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है. भक्त सभी दुखों से मुक्त होकर जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त करते हैं. आइए जानते हैं इससे जुड़ी पौराणिक कथा.

तारकासुर का आतंक

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय धरती पर तारकासुर नाम का दैत्य अत्याचार करने लगा. कठोर तपस्या से उसने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न कर लिया और अमरता का वरदान मांगा परंतु न मिलने पर उसने चतुराई से यह वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों हो.

ब्रह्मा जी ने ‘तथास्तु’ कहा और इसके बाद तारकासुर का आतंक तीनों लोकों में फैल गया. उसने देवताओं को हराकर स्वयं को तीनों लोकों का स्वामी घोषित कर दिया.

देवताओं की गुहार

देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी. विष्णु जी ने बताया कि तारकासुर का वध केवल शिव पुत्र ही कर सकते हैं. इसी कारण देवताओं ने शिवजी से विवाह की प्रार्थना की. तब भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया और उनके पुत्र का जन्म हुआ.

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कार्तिकेय का जन्म और युद्ध

शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय (जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है) का जन्म हुआ. माता पार्वती ने स्वयं उन्हें युद्धकला और अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान दिया. युवा होने पर कार्तिकेय देवसेना के सेनापति बने और उन्होंने अपने पराक्रम से तारकासुर का वध कर तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया.

क्यों कहलाती हैं स्कंदमाता?

कार्तिकेय के माता स्वरूप में पार्वती को स्कंदमाता कहा गया. उनके इस रूप में बालक स्कंद सदैव उनकी गोद में विराजते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि मां अपने भक्तों की रक्षा करना कभी नहीं छोड़तीं हैं.
मां स्कंदमाता की उपासना से करने से न केवल संतान सुख की प्राप्ति होती है बल्कि जीवन में ज्ञान और बुद्धि बढ़ती है और सच्चे मन से उपासना करने पर भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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