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महादेव का अद्भुत संसार, जहां शिवलिंग का समुद्र करता है जलाभिषेक

देवों के देव Mahadev का संसार बड़ा निराला है. महादेव के कई ऐसे शिवलिंग (Shiva Linga) हैं, जिनके चमत्कार के बारे में जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे.

देवों के देव महादेव (Mahadev) का संसार बड़ा निराला है. देश के हर कोने में स्थित महादेव के ज्योतिर्लिंग के साथ ही महादेव के कई ऐसे शिवलिंग भी हैं, जिनके चमत्कार के बारे में जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. ऐसे में गुजरात (Gujarat) में महादेव का एक ऐसा धाम है, जहां समुद्र के किनारे चट्टान के नीचे 5 शिवलिंग (Shiva Linga) विराजमान हैं और अरब सागर इन शिवलिंग का लगातार अभिषेक करता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इन शिवलिंग को पांडवों ने स्थापित किया था.

क्या है मान्यता ?

गुजरात के फुदम गांव में स्थित गंगेश्वर महादेव का यह मंदिर, जिसके बारे में मान्यता है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस शिवलिंग को स्थापित किया था. यह गुजरात के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। यहां महादेव का अभिषेक आठों प्रहर समुद्र खुद करता है.

कहां है शिवलिंग ?

समुद्र के किनारे कटी हुई चट्टानों से बनी गुफा के भीतर यह शिवलिंग स्थित है. यह एक गुफा मंदिर है, जहां हर कुछ समयांतराल के बाद समुद्र की लहरें आकर शिवलिंग का अभिषेक कर वापस लौट जाती हैं. इस मंदिर में इसके साथ भगवान गणेश, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की भी मूर्ति मौजूद है. इन पांचों शिवलिंग के बारे में यह भी मान्यता है कि यह स्वयंभू हैं. इस मंदिर को यहां पंच शिवलिंग मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. वहीं, इसे सीशोर मंदिर के नाम से भी ख्याति प्राप्त है. गुजरात के फुदम गांव से कुछ किलोमीटर दूर यह मंदिर एक छोटे से द्वीप दीव में स्थित है. दीव एक छोटा सा द्वीप है, जो गुजरात के सौराष्‍ट्र प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित है. वहीं, गुजरात के भावनगर में कोलियाक तट से तीन किलोमीटर अंदर अरब सागर में निष्कलंक महादेव का मंदिर स्थित है. इस मंदिर में अरब सागर की लहरें रोज पांच शिवलिंग का जलाभिषेक करती हैं.

कैसे कर सकते हैं दर्शन ?

मान्यता है कि इस शिवलिंग के पास में ही एक कुंड है, जिसमें अक्षय तृतीया के दिन स्वयं गंगा जी प्रकट होती हैं. इस मंदिर में महादेव के दर्शन के लिए आपको इंतजार करना पड़ता है. यहां समुद्र दोपहर एक बजे से रात 10 बजे तक महादेव के दर्शन के लिए भक्तों को रास्ता देता है. यानी भक्त इतने ही समयावधि में यहां महादेव का दर्शन कर सकते हैं. इसके बाद शिवलिंग के दर्शन आप नहीं कर सकते हैं.

समुद्र में जैसे-जैसे ज्वार बढ़ता है, शिवलिंग डूब जाता है और मंदिर का पताका और स्तंभ ही केवल नजर आता है. दर्शनार्थियों को महादेव के दर्शन के लिए समुद्र में पैदल चलकर जाना होता है. यहां समुद्र के बीच एक चबूतरे पर हर तरफ एक-एक कर पांच शिवलिंग हैं और एक छोटा सा तालाब है, जिसे पांडव तालाब भी कहते हैं. श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना से पहले इसी तालाब में आचमन करते हैं.

एक मान्यता ये भी

यहां के बारे में मान्यता है कि अगर भक्त किसी परिजन की चिता की राख को शिवलिंग पर लगाकर यहां प्रवाहित कर दें तो उनके परिजन को मुक्ति मिल जाती है. इस मंदिर को भी महाभारत के काल से ही जोड़ा जाता है. इन 5 शिवलिंग के बारे में पौराणिक मान्यता है कि यहां महादेव ने पांडवों को लिंग रूप में दर्शन दिए थे.

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-भारत एक्सप्रेस

(साभार IANS न्यूज एजेंसी)



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