क्या है रक्षा पंचमी का महत्व?
Raksha Panchami 2026: भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का पर्व रक्षाबंधन तो हर साल धूमधाम से मनाया ही जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके ठीक बाद आने वाली ‘रक्षा पंचमी’ का भी हमारे समाज और परंपराओं में कितना गहरा महत्व है? खासकर ओडिशा और देश के कई अन्य हिस्सों में इस त्योहार को बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जिसे कई जगहों पर रेखा पंचमी या शांति पंचमी के नाम से भी पुकारा जाता है.
क्यों खास है रक्षा पंचमी?
कई बार ऐसा होता है कि व्यस्तता या किसी अन्य जरूरी कारण से भाई-बहन रक्षाबंधन के दिन ना तो मिल पाते हैं और ना ही कलाई पर राखी बंध पाती है. ऐसे लोगों के लिए रक्षा पंचमी का दिन एक मौका लेकर आता है. मान्यता है कि अगर रक्षाबंधन पर राखी बांधने की रस्म पूरी नहीं हो पाई हो, तो इस दिन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर इस परंपरा को निभाया जा सकता है. यह दिन केवल छूटी हुई रस्म को पूरा करने का ही नहीं बल्कि पूरे परिवार की सुख-शांति और आपसी रिश्तों में मिठास बनाए रखने की कामना करने का भी होता है.
पूजा और सुरक्षा से जुड़ी खास परंपराएं
हमारे यहां रक्षासूत्र को महज एक साधारण धागा नहीं माना जाता बल्कि यह सुरक्षा, विश्वास और सकारात्मकता का प्रतीक है. यही वजह है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से भगवान की पूजा की जाती है और परिवार की रक्षा की प्रार्थना होती है. इसके अलावा कई जगहों पर इस दिन से जुड़ी कुछ अनोखी लोक-परंपराएं भी निभाई जाती हैं.
ऐसी मान्यता है कि रक्षा पंचमी के दिन भगवान भैरव की आराधना करने से संकटों और अनचाहे डर से मुक्ति मिलती है. इसी आस्था के चलते कई लोग अपने घर के मुख्य दरवाजे पर भगवान भैरव या गणेश जी के शुभ चिह्न बनाते हैं या चित्र अंकित करते हैं, ताकि घर में किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश न कर सके.
देख जाए तो रक्षा पंचमी का यह पर्व हमें अपने रिश्तों को एक और मौका देने और घर-परिवार में सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश देता है. तो अगर आपकी भी इस बार रक्षाबंधन पर राखी बांधने की कोई रस्म रह गई थी तो आप इस पावन तिथि पर उसे पूरा कर सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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