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कष्टभंजन देव हनुमानजी के नाम और तस्वीरों को मिली कानूनी सुरक्षा, ट्रस्ट ने कराया ट्रेडमार्क

Sarangpur Hanuman Mandir trademark: गुजरात के सारंगपुर हनुमानजी मंदिर ट्रस्ट ने हनुमानजी के नाम, रूप और तस्वीरों को कॉपीराइट व ट्रेडमार्क से सुरक्षित कराया है. अब बिना अनुमति कोई भी संस्था या व्यक्ति इनका व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकेगा.

Sarangpur Hanuman Mandir trademark

Sarangpur Hanuman Mandir trademark

Sarangpur Hanuman Mandir trademark: गुजरात के प्रसिद्ध तीर्थस्थल सारंगपुर स्थित श्री कष्टभंजन देव हनुमानजी मंदिर ने एक ऐतिहासिक और अनोखी पहल करते हुए धार्मिक एवं आध्यात्मिक विरासत को कानूनी सुरक्षा प्रदान की है. अब सारंगपुर हनुमानजी महाराज के नाम, दिव्य रूपों, तस्वीरों और आध्यात्मिक पहचान का किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा बिना ट्रस्ट की अनुमति के व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. मंदिर ट्रस्ट ने कॉपीराइट और ट्रेडमार्क के जरिए इस विरासत को संरक्षित कराया है, जिसे देश में अपनी तरह की पहली पहल माना जा रहा है.

ट्रस्ट ने कराया कॉपीराइट और ट्रेडमार्क

मंदिर ट्रस्ट की इस पहल के बाद भक्तों और श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल है. ट्रस्ट का कहना है कि यह कदम केवल कानूनी सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक कानूनी ढांचे के तहत सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा प्रयास है. सारंगपुर हनुमानजी मंदिर ट्रस्ट के स्वामी विवेक सागर ने बताया कि हनुमानजी के नाम, स्वरूप और उनसे जुड़ी आध्यात्मिक पहचान को कॉपीराइट और ट्रेडमार्क कराया गया है. उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया हनुमानजी के चरणों में समर्पित है और इसका उद्देश्य श्रद्धा और परंपरा की रक्षा करना है.

सारंगपुर का श्री कष्टभंजन हनुमान मंदिर

सारंगपुर का श्री कष्टभंजन हनुमान मंदिर गुजरात ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में करोड़ों भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय के वड़ताल गद्दी के अंतर्गत आता है और इसकी सबसे खास बात यह है कि यहां हनुमानजी को मुख्य देवता के रूप में पूजा जाता है. स्वामीनारायण संप्रदाय में यह एकमात्र ऐसा प्रमुख मंदिर है, जहां भगवान स्वामीनारायण या श्रीकृष्ण की प्रतिमा मुख्य देवता के रूप में स्थापित नहीं है.

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विशाल प्रतिमा ने दुनियाभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किया आकर्षित 

मंदिर की पहचान पिछले कुछ महीनों में और भी बढ़ी है, जब यहां 54 फुट ऊंची भव्य हनुमान प्रतिमा स्थापित की गई. इस विशाल प्रतिमा ने दुनियाभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित किया है. बीएपीएस के आत्मतृप्त स्वामी के अनुसार, सारंगपुर में पूज्य संत गोपालानंद स्वामी ने कष्टभंजन देव हनुमानजी की मूर्ति की स्थापना की थी. यही कारण है कि यह मंदिर आध्यात्मिक शक्ति, श्रद्धा और चमत्कारिक आस्था का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक विरासत को कॉपीराइट और ट्रेडमार्क से सुरक्षित करने की यह पहल आने वाले समय में अन्य धार्मिक संस्थाओं के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है.

भारत एक्सप्रेस



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