Sawan 2026: सावन का महीना शुरू होते ही चारों तरफ ‘हर हर महादेव’ की गूंज सुनाई देने लगती है. इस पवित्र महीने के दौरान हर साल उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित कनखल के प्रसिद्ध दक्षेश्वर महादेव मंदिर में शिव भक्तों का तांता लगा रहता है. हर कोई यहां महादेव के दर्शन करने आता है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस मंदिर में ऐसा खास क्या है? दरअसल, पौराणिक कथाओं के अनुसार सावन के पूरे महीने भगवान शिव दक्षेश्वर महादेव मंदिर में ही रहते हैं. बताया जाता है कि कनखल उनकी ससुराल है और सावन के महीने में यहीं से वे अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं. इस परंपरा के पीछे एक काफी दिलचस्प किस्सा और भगवान शिव का अपनी सास को किया एक वादा भी है, चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.
क्या है पौराणिक मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जब माता सती ब्रह्मांड में लीन हो गईं तब भगवान शिव की सास काफी दुखी हुईं और उन्होंने भोलेनाथ से सवाल किया कि अब सावन के महीने में उनकी बेटी की कमी कौन पूरी करेगा क्योंकि सावन में तो बेटियां अपने मायके लौट आती हैं. तब भोलेनाथ ने अपनी सास को वचन दिया था कि वे हर साल सावन का पूरा महीना अपनी ससुराल कनखल में ही बिताएंगे. बस तभी से यह परंपरा चली आ रही है और शिवजी सावन भर यहीं विराजमान रहते हैं.
भक्तों की सारी मन्नत होती है पूरी
कहा जाता है कि सावन के महीने में कनखल के दक्षेश्वर महादेव मंदिर का नजारा देखते ही बनता है. यहां पहुंचने वाले हर भक्त का मानना है कि जो भी सच्चे मन से शिवलिंग पर गंगा जल अर्पित करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. मंदिर में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं. कई भक्त बताते हैं कि उन्होंने यहां जो भी मन्नत मांगी भोलेनाथ ने उनकी हर बार सुनी है.
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बेहद खास है दक्षेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास
यह वही ऐतिहासिक पावन स्थल है जहां कभी भगवान शिव की बारात आई थी. इस मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू (प्रकट हुआ) माना जाता है, जिसकी महिमा पूरे ब्रह्मांड में है. ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर राजा दक्ष को भगवान शिव ने नया जीवनदान दिया था. यही वजह है कि सावन के इस पावन महीने में इस मंदिर की छटा और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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