Sharadiya Navratri 2025: सोमवार से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो रही है. मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा से नवरात्र का शुभारंभ होगा. इस बार नवरात्र 10 दिनों तक चलेंगे. कारण है कि चतुर्थी तिथि दो बार पड़ रही है. 30 सितंबर को अष्टमी और 1 अक्टूबर को नवमी पूजन होगा.
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
घटस्थापना के लिए शुभ समय सुबह 6:09 से 8:06 बजे तक रहेगा. इसके बाद अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा की जा सकती है, जो 11:49 से 12:38 बजे तक है. इस दौरान विधि-विधान से कलश स्थापना करने पर मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है.
किस पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा?
अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र का प्रारंभ होता है. आचार्य के अनुसार, नवरात्र व्रत करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा मिलती है. इस बार माता का आगमन हाथी पर हो रहा है और प्रस्थान मनुष्य के कंधों पर होगा. इसे शुभ संकेत माना जा रहा है.
मंदिर और बाजार में रौनक
नवरात्र को लेकर मंदिर समितियों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. जागरण और भजन संध्याओं की योजना भी बनाई गई है. बाजारों में पूजा का सामान सज चुका है. सहारनपुर चौक और हनुमान चौक सहित कई स्थानों पर मां की प्रतिमाएं, कलश, हवन सामग्री और चुनरियां उपलब्ध हैं.
कलश स्थापना की विधि
उत्तराखंड विद्वत सभा के प्रवक्ता विपिन डोभाल ने बताया कि सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें.
मंदिर की सफाई कर गंगाजल छिड़कें.
लाल कपड़ा बिछाकर चावल रखें.
मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें.
कलश पर आम या अशोक के पत्ते सजाएं और स्वास्तिक बनाएं.
इसमें सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें.
नारियल पर चुनरी लपेटकर कलावा बांधें और कलश पर रखें.
मां दुर्गा का आह्वान कर दीप प्रज्वलित करें.
ये भी पढ़ें: Pitru Paksha Special: श्राद्ध अनुष्ठानों में क्यों किया जाता है काले तिल का प्रयोग? जानें पौराणिक कथा और मान्यता
नौ दिन की पूजन तिथियां
22 सितंबर: प्रतिपदा – शैलपुत्री
23 सितंबर: द्वितीया – ब्रह्मचारिणी
24 सितंबर: तृतीया – चंद्रघंटा
25 सितंबर: तृतीया – चंद्रघंटा (अतिरिक्त तिथि)
26 सितंबर: चतुर्थी – कूष्मांडा
27 सितंबर: पंचमी – स्कंदमाता
28 सितंबर: षष्ठी – कात्यायनी
29 सितंबर: सप्तमी – कालरात्रि
30 सितंबर: अष्टमी – महागौरी
1 अक्टूबर: नवमी – सिद्धिदात्री
मंदिरों में सजा माहौल
शहर के मंदिरों को लाइटों और फूलों से सजाया जा रहा है. मां डाटकाली मंदिर, कालिका माता मंदिर, पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर, वैष्णो देवी गुफा योग मंदिर और अन्य स्थलों पर विशेष तैयारियां चल रही हैं. श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचेंगे.
Also Follow Bharat Express on X
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



