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75 साल का गौरव: आस्था, स्वर्ण और शिव भक्ति का केंद्र बना सोमनाथ; जानें इस भव्य मंदिर के अनसुने रहस्य

पुनर्निर्माण के बाद सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के आज 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं. देश के पहले ज्योतिर्लिंग के रूप में विख्यात इस मंदिर का इतिहास जितना प्राचीन है, इसका वर्तमान उतना ही भव्य. स्वर्ण कलशों से सजे इस मंदिर के रहस्य और पीएम मोदी के विजन ने इसे आज दुनिया का प्रमुख धार्मिक केंद्र बना दिया है.

Somnath Temple 75th Anniversary History, Mysteries, and PM Modi's Connection

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Somnath Temple 75 Years: आज का दिन भारतीय संस्कृति और आस्था के इतिहास में बेहद खास है. 11 मई 1951 को आधुनिक भारत के पुनर्निर्माण के बाद जब सोमनाथ मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की गई थी, आज उस ऐतिहासिक पल के 75 गौरवशाली साल पूरे हो रहे हैं. गुजरात के प्रभास पाटन में समुद्र किनारे खड़ा ये मंदिर सिर्फ पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है.

ऋग्वेद से लेकर स्कंद पुराण तक में जिस मंदिर का वर्णन मिलता है, वह सोमनाथ आज अपने ‘स्वर्ण युग’ में है. आइए, इस खास मौके पर जानते हैं सोमनाथ मंदिर की भव्यता, इसके अनसुलझे रहस्य और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इसके खास जुड़ाव की कहानी.

शिव भक्त मोदी: मंदिर के कायाकल्प में बड़ा योगदान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सोमनाथ से नाता बहुत पुराना और गहरा है. 1 फरवरी 2014 को जब उन्होंने मंदिर के स्वर्ण शिखर का उद्घाटन किया था, तभी से मंदिर की चमक पूरी दुनिया में फैलने लगी थी. साल 2017 में पीएम के तौर पर उन्होंने यहाँ पहली बार विशेष पूजा की और जनवरी 2021 में उन्हें सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट का चेयरमैन नियुक्त किया गया. उनके कार्यकाल में मंदिर परिसर में कई आधुनिक प्रोजेक्ट्स और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है, जिससे आज यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को एक दिव्य अनुभव मिलता है.

भव्य… दिव्य सोमनाथ मंदिर का वास्तु

सोमनाथ मंदिर को देखना अपने आप में एक अलौकिक अनुभव है. 155 फीट ऊंचे इस दो मंजिला मंदिर के ऊपर 11 मीटर लंबा ध्वजदंड लहराता है. लेकिन सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं यहाँ के 1666 स्वर्ण कलश. इन कलशों का कुल वजन करीब 10 टन है, जिसकी चमक दूर समुद्र से ही दिखाई देती है. यह मंदिर अपनी मालवा शैली के वास्तुशिल्प के लिए जाना जाता है, जिसे 12वीं सदी में राजपूत राजाओं ने जीवंत किया था.

रहस्य, जो आज भी करता हैं हैरान

प्राचीन सोमनाथ मंदिर अपनी वास्तुकला और चमत्कारों के लिए दुनिया भर में मशहूर था. कहा जाता है कि पुराना मंदिर लकड़ी के 56 खंभों पर टिका था और इसकी मुख्य मूर्ति बिना किसी सहारे के हवा में लटकी रहती थी. यह उस समय के विज्ञान और इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना था. मंदिर की छत सोने से जड़ी थी और यहाँ 40 मन (लगभग 1600 किलो) वजनी सोने का एक घंटा लटका रहता था.

हालाँकि, इस समृद्धि ने आक्रांताओं की नजरें भी अपनी ओर खींची. साल 1026 में महमूद गजनवी ने मंदिर पर हमला किया और करीब 6 टन सोना लूट लिया. लेकिन इतिहास गवाह है कि सोमनाथ को जितनी बार गिराने की कोशिश हुई, वह हर बार और अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ा हुआ.

इतिहास में पहली बार: शिखर कुंभाभिषेक

75वीं वर्षगांठ के इस मौके पर सोमनाथ में कुछ ऐसा होने जा रहा है जो पहले कभी नहीं हुआ. मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर पहली बार ‘कुंभाभिषेक’ किया जाएगा. इसके लिए 11 पवित्र तीर्थों का जल लाया गया है. 8×9 फीट के विशेष कलश से होने वाले इस अभिषेक के दौरान 51 ब्राह्मण ‘अति रुद्र पाठ’ करेंगे. साथ ही, महारुद्र यज्ञ में सवा लाख आहुतियां दी जाएंगी, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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