Unique Devi Siddhidatri Mandir: भोपाल के कोलार रोड पर पहाड़ियों की गोद में बसा देवी सिद्धिदात्री मंदिर अपनी अनोखी पूजा पद्धति और भक्ति के लिए खासा मशहूर है. स्थानीय लोग इसे जीजीबाई माता मंदिर या पहाड़ी वाली माता के नाम से भी जानते हैं.
इस मंदिर की खासियत यही है कि यहां देवी सिद्धिदात्री की पूजा उनके बाल स्वरूप के रूप में की जाती है. भक्त यहां देवी को बेटी की तरह पूजते हैं और मानते हैं कि माता की इस भक्ति से उनके परिवार में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है.
मंदिर की सबसे अलग और दिलचस्प परंपरा है कि यहां देवी को फूलों की माला की जगह जूते-चप्पल, कपड़े और श्रृंगार के सामान चढ़ाए जाते हैं. यह परंपरा करीब तीस सालों से चली आ रही है और इसके पीछे एक सामाजिक संदेश भी छुपा है. जो सामान भक्त यहां चढ़ाते हैं, उन्हें बाद में जरूरतमंद लड़कियों में बांट दिया जाता है. इस तरह यह मंदिर सिर्फ भक्ति का केंद्र नहीं बल्कि परोपकार और सेवा का भी प्रतीक बन चुका है.
मंदिर की मान्यता
मंदिर से जुड़ी कोई प्राचीन या पौराणिक कथा तो नहीं मिलती, लेकिन स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मंदिर के संस्थापक को सपने में देवी ने कहा था कि कोई भी लड़की नंगे पैर न चले. इसी वजह से यहां भक्त जूते-चप्पल चढ़ाते हैं.
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि मूर्ति स्थापना के समय यहां शिव-पार्वती विवाह का आयोजन हुआ था जिसमें देवी का कन्यादान किया गया. इसलिए भक्त देवी को अपनी बेटी की तरह मानकर उनकी हर इच्छा पूरी करते हैं.
माता पर चढ़ती हैं ये सामग्री
मंदिर में भक्त पारंपरिक पूजा सामग्री के अलावा नए जूते, चप्पल, कपड़े, छाता, चश्मा, कंघा, इत्र जैसी चीजें भी चढ़ाते हैं. खासकर बच्चों के जूते ज्यादा चढ़ाए जाते हैं, जबकि वयस्कों के जूते एक बॉक्स में रखे जाते हैं और बाद में इन्हें जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाता है. भक्तों का मानना है कि जो सच्चे मन से देवी को ये चढ़ावा अर्पित करते हैं, उनकी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं.
मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 300 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो इसे और भी खास अनुभव बनाती हैं. पहाड़ियों की ठंडी हवा और प्राकृतिक सुंदरता के बीच भक्त माता के दर्शन करते हैं और यहां की शांति का आनंद लेते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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