T20 World Cup: भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए एक अच्छी खबर है कि सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया शान से सुपर-8 में पहुंच गई है. ग्रुप स्टेज में भारत ने एक भी मैच नहीं हारा और अगले दौर का टिकट कटाया. लेकिन, जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ रहा है, टीम की एक ऐसी कमजोरी खुलकर सामने आई है जिसने क्रिकेट पंडितों की चिंता काफी ज्यादा बढ़ा दी है.
टीम इंडिया की एक ऐसी कमजोरी खुलकर सामने आई है जिसने क्रिकेट पंडितों की भी चिंता बढ़ा दी है. हैरानी की बात ये है कि जिस भारतीय बल्लेबाज तो स्पिन खेलने में माहिर माना जाता था, वही टीम अब ऑफ स्पिमर्स के सामने संघर्ष करती दिखाी दे रही है.
स्पिन के चक्रव्यूह में फंसी टीम इंडिया
टी-20 क्रिकेट के आज के दौर में जहां 8 से 9 रन प्रति ओवर बनाना मामूली बात है, वहां ग्रुप स्टेज के मैचों में भारतीय बल्लेबाज ऑफ स्पिन के खिलाफ महज 6.23 की औसत से ही रन बना पाए. यह आंकड़ा वाकई परेशान करने वाला है. ग्रुप चरण के दौरान भारत ने ऑफ स्पिन की कुल 102 गेंदों का सामना किया, जिसमें रन गति तो सुस्त रही ही, साथ ही विकेट गिरने का सिलसिला भी नहीं थमा.
आंकड़ों की गगराई में जाए तो पता चलता है कि ऑऱ स्पिन के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों का औसत मात्र 13.25 रहा है. जिन 13 टीमों ने कम से कम 6 ओवर ऑफ स्पिन खेली, उनमें भारत की रन गति सिर्फ नेपाल और ओमान जैसी टीमों से थोड़ी बेहतक रही.
बाएं हाथ के बल्लेबाजों की भरमार बनी सिरदर्द
टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर में अभिषेक शर्मा, ईशान किशन और तिलक वर्मा के रूप में तीन खतरनाक बाएं हाथ के बल्लेबाज मौजूद हैं. कागज पर तो यह कॉम्बिनेशन बहुत मजबूत दिखता है, लेकिन यही बात विपक्षी टीमों के लिए रणनीति बनाना आसान कर रही है. हर टीम अब भारत के खिलाफ एक ही फॉर्मूला अपना रही है- पॉवरप्ले में ऑफ स्पिनर लगाओ, रन गति पर लगाम कसो और बाएं हाथ के बल्लेबाजों पर दबाव बनाओ.
नीदरलैंड्स के खिलाफ मैच में देखा गया कि कैसे आर्यन दत्त ने पॉवरप्ले में ही अभिषेक और ईशान को चलता कर दिया. वहीं नामीबिया और पाकिस्तान के खिलाफ भी हमारे बल्लेबाज ऑफ स्पिन की विविधता को समझने में नाकाम रहे. विशेषकर अभिषेक शर्मा की फॉर्म चिंता का विषय है, जो तीन मैचों में खाता भी नहीं खोल पाए और ऑफ स्पिनर के खिलाफ बड़ा शॉट खेलने के चक्कर में अपना विकेट दे बैठे.
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सुधार के बिना मुश्किल होगा सफर
भले ही सहायक कोच रयान टेन डोएशे अभिषेक की फॉर्म को लेकर आश्वस्त हों और कह रहे हों कि नेट्स में वे अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं, लेकिन हकीकत मैदान पर कुछ और ही है. डोएशे ने भी स्वीकार किया है कि फिंगर स्पिन के खिलाफ टीम को अपने खेल में सुधार करना होगा.
बताते चलें कि अब सुपर-8 में चुनौती और कड़ी होने वाली है. भारत का सामना दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज जैसी टीमों से होगा, जिनके पास बेहतरीन फिंगर स्पिनर्स मौजूद हैं. अगर पिचों में थोड़ा भी धीमापन रहा, तो ऑफ स्पिन का यह खतरा टीम इंडिया के वर्ल्ड कप जीतने के सपने में रोड़ा अटका सकता है. अब देखना यह है कि सूर्या की सेना इस ‘स्पिन फियर’ से कैसे पार पाती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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