मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम गुरुवार 5 मार्च को एक बार फिर क्रिकेट के रोमांच से भर जाएगा. टीम इंडिया यहां टी20 वर्ल्ड कप 2026 ( T20 world cup 2026) के दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड से भिड़ेगी. भारतीय फैंस के लिए यह मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं बल्कि पुराने दर्द को मिटाने का मौका भी है.
2016 की हार की कसक
दस साल पहले इसी मैदान पर भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 वर्ल्ड ( T20 world cup) का सेमीफाइनल खेला था. विराट कोहली ने उस मैच में 89 रन की नाबाद पारी खेली थी और भारत ने 195 रन का लक्ष्य दिया था लेकिन फील्डिंग और गेंदबाजी की गलतीयों ने टीम इंडिया को हार दिलाई. वेस्टइंडीज ने जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई और खिताब भी जीता. यही हार आज भी भारतीय क्रिकेट प्रमियों को याद है.
मौजूदा टूर्नामेंट की तस्वीर
इस बार भी भारतीय टीम सेमीफाइनल तक पहुंची है लेकिन प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा. टीम ने ग्रुप स्टेज में संघर्ष करते हुए आगे बढ़ने का रास्ता बनाया है. अब फाइनल में पहुंचने के लिए कोई चूक नहीं करनी होगी. इंग्लैंड भी इसी तरह लड़खड़ाते हुए सेमीफाइनल तक पहुंचा है इसलिए मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है.
वानखेड़े का पुराना जख्म
वानखेड़े और सेमीफाइनल का दर्द सिर्फ 2016 तक सीमित नहीं है. 1987 में वनडे वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल भी इसी मैदान पर खेला गया था. उस समय भारत डिफेंडिंग चैंपियन था और इंग्लैंड से भिड़ा था लेकिन इंग्लैंड ने भारत को हराकर फाइनल में जगह बनाई. उस हार ने भारतीय क्रिकेट प्रेमीयों को गहरा झटका दिया था.
इतिहास दोराएगा या बदला लेगा?
अब 2026 में फिर वही स्थिति है. भारत मौजूदा चैंपियन है और खिताब का दावेदार भी. इंग्लैंड भी मजबूत टीम है. सवाल यही है कि क्या वानखेडे का मैदान तीसरी बार भारत का दिल तोड़ेगा या इस बार टीम इंडिया इतिहास बदल देगी.
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फैंस की उम्मीदें
भारतीय फैंस के लिए यह मैच भावनाओं से जुड़ा है. वे चाहते हैं कि इस बार वानखेडे का मैदान भारत के लिए लकी साबित हो. अगर टीम इंडिया जीतती है तो यह सिर्फ फाइनल में पहुंचने की बात नहीं होगी बल्कि पुराने जख्मों पर मरहम लगाने जैसा होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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