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NALSA की नेशनल कॉन्‍फ्रेंस में CJI बी.आर. गवई का संबोधन, गांधीजी की प्रेरणा से गरीबों तक न्याय पहुंचाने पर दिया जोर

CJI जस्टिस बीआर गवई ने आज राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) की कॉन्‍फ्रेंस में संबोधन दिया. उन्‍होंने कानूनी सहायता को गांधी जी की कुंजी बताते हुए गरीबों तक न्याय पहुंचाने पर जोर दिया. मणिपुर की बुजुर्ग महिला से जुड़ी भावुक यादें भी साझा कीं.

NALSA CJI B.R. Gavai PM Modi
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Strengthening Legal Aid Delivery Mechanisms: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने शनिवार को राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) के राष्ट्रीय सम्मेलन ‘स्ट्रेंग्थनिंग लीगल एड डिलीवरी मैकेनिज्म्स’ के उद्घाटन सत्र में संबोधन दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश ने कानूनी सहायता को महात्मा गांधी के ‘यन्त्र (Talisman)’ का रूप बताया और कहा कि न्याय का गरीबों और कमजोरों तक पहुंचना ही असली सफलता है.

NALSA के सम्मेलन के ये उद्घाटन व समापन सत्र सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट व यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीम किए गए.

प्रधानमंत्री का आभार और NALSA की सराहना

मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए की. उन्होंने कहा, “मैं धन्यवाद देता हूं कि व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद प्रधानमंत्री जी ने इस अवसर पर गरिमा प्रदान की. उनकी उपस्थिति विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की साझा जिम्मेदारी को दर्शाती है.” उन्होंने NALSA की टीम और भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत को बधाई दी, जो सम्मेलन के आयोजन में नेतृत्व कर रहे हैं.

सम्मेलन के विषयों पर प्रकाश डालते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा,


“लीगल एड डिलीवरी सिस्टम (LADCS), पैनल वकीलों व पैरा-लीगल वालंटियर्स की क्षमता निर्माण, स्थायी लोक अदालतों को मजबूत करना और कानूनी सेवा संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन जैसे विषय प्रगति की समीक्षा और भविष्य की दिशा तय करने वाले हैं. ये हमें मजबूत संस्थाएं, कुशल कर्मी और सतत न्याय वितरण प्रणाली बनाने की प्रेरणा देते हैं.”

महात्‍मा गांधी के विचारों से ली गई प्रेरणा अहम

महात्‍मा गांधी की कुंजी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हर साल लीगल सर्विसेज डे पर मैं गांधी जी के उस कुंजी पर विचार करता हूं, जिसमें उन्होंने कहा था कि संदेह होने पर सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति का चेहरा याद करो और पूछो कि हमारा कदम उन्हें फायदा पहुंचाएगा या नहीं. कानूनी सहायता आंदोलन यही कुंजी है. न्याय कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं, हर नागरिक का अधिकार है. हमारा काम है कि न्याय की रोशनी समाज के किनारे पर खड़े आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे.”

मणिपुर के चुराचांदपुर राहत शिविर की भावुक यादें

मुख्य न्यायाधीश ने मणिपुर के चुराचांदपुर राहत शिविर की याद साझा की. उन्‍होंने कहा- “NALSA से जुड़े रहते हुए मैंने वहां राहत सामग्री बांटी. एक बुजुर्ग महिला ने आंसुओं भरी आंखों से हाथ जोड़कर कहा, ‘बने रहो, भैया’. यह पल मुझे याद दिलाता है कि हमारी सफलता आंकड़ों या वार्षिक रिपोर्टों में नहीं, बल्कि उन नागरिकों की शांत कृतज्ञता और नवीकृत विश्वास में है जो खुद को अदृश्य महसूस करते थे.”

पैरा-लीगल वालंटियर्स और पैनल वकीलों की भूमिका

उन्होंने पैरा-लीगल वालंटियर्स और पैनल वकीलों को ‘कानूनी सहायता आंदोलन के सैनिक’ बताते हुए सराहा, “उनकी मेहनत के बिना न्याय का सपना जमीनी स्तर पर नहीं पहुंचता. वे संस्था और व्यक्ति, संविधान के वादे और रोजमर्रा की हकीकत के बीच पुल हैं. उनकी करुणा, समर्पण और दृढ़ता से हमारे प्रयास सार्थक होते हैं.”

NALSA CJI B.R. Gavai Speech

कानूनी सहायता को जीवंत आंदोलन बनाने का आह्वान

मुख्य न्यायाधीश ने कानूनी सहायता को प्रतिक्रियावादी नहीं, जीवंत आंदोलन बनाने पर बल दिया, “हमें संकट का इंतजार नहीं करना चाहिए. समाज कैसे बदल रहा है, नई चुनौतियां, बहिष्कार के नए रूप और लोगों की उभरती जरूरतों पर विचार करना चाहिए. न्यायपूर्ण समाज की ताकत अन्याय की आशंका होने से पहले वहां पहुंचने में है.”

संविधान की 75वीं वर्षगांठ: मुख्य न्यायाधीश का संकल्प

संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर उन्होंने कहा, “कानूनी सहायता आंदोलन प्रस्तावना में निहित न्याय – सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक – की दृष्टि को आगे बढ़ाए. संविधान का वादा तभी पूरा होगा जब जाति, लिंग, भाषा या परिस्थितियों से परे हर व्यक्ति महसूस करे कि न्याय व्यवस्था उनकी है.”

आंबेडकर के उद्धरण से प्रेरणा और सम्मेलन का महत्व

अपने संबोधन के अंत में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के उद्धरण से प्रेरणा देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हमारी लड़ाई धन या सत्ता के लिए नहीं, स्वतंत्रता और मानव व्यक्तित्व की पुनर्प्राप्ति के लिए है. कानूनी सहायता आंदोलन रोजाना अनसुनी आवाजों को आवाज और सम्मान लौटाता है.” उन्होंने सम्मेलन को चर्चा का मंच नहीं, नवाचार, सहयोग और कानून की परिवर्तनकारी शक्ति में विश्वास की पुष्टि का आह्वान बताया. हर छोटा कानूनी सहायता कार्य राष्ट्र-निर्माण है.

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पदाधिकारी और विभिन्न हाईकोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीश उपस्थित थे. सम्मेलन 9 नवंबर को समाप्त होगा.

लाइव स्ट्रीमिंग लिंक:
उद्घाटन – https://youtube.com/live/6UyCt_j2ghw?feature=share;
समापन – https://youtube.com/live/nR296ktYAbE?feature=share.

SIFOCC में CJI बी.आर. गवई का संबोधन, मुख्य न्यायाधीश ने देश में व्यावसायिक कानून की यात्रा पर डाला प्रकाश



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