Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

entertainment

स्मृति ने खुलासा किया कि साल 2014 में शो के सीजन 2 की प्लानिंग हो गई थी, यहां तक की शूटिंग भी शरू कर दी गई थी. लेकिन आखिरी वक्त पर स्मृति ईरानी ने शो करने से इनकार कर दिया. इस इनकार की वजह सिर्फ एक फोन कॉल थी.

Sardaarji 3 Controversy: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सरदार जी 3’ में पाकिस्तानी एक्ट्रेस हानिया आमिर की मौजूदगी से AICWA भड़का. संगठन ने दिलजीत को बॉयकॉट की चेतावनी दी है.

Tommy Genesis Controversial Video: देवी काली जैसे लुक और धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर रैपर टॉमी जेनेसिस के म्यूजिक वीडियो पर विवाद। सोशल मीडिया पर विरोध, रैपर रफ्तार ने भी जताई नाराजगी।

Jafar Panahi Movie It Was Just an Accident: जफर पनाही ने 'इट वाज जस्ट ऐन एक्सीडेंट' के लिए 78वें कान फिल्म फेस्टिवल में पाल्मा डोर जीता. फिल्म में हिजाब कानून का प्रतिरोध दिखाया गया. ग्रैंड प्रिक्स 'सेंटीमेंटल वैल्यू' को मिला.

78वें कान फिल्म समारोह में अभय सिन्हा को इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म प्रोड्यूसर का उपाध्यक्ष चुना गया. यह भारतीय सिनेमा का सम्मान है. इंपा ने कान में स्टॉल लगाकर छोटे निर्माताओं को वैश्विक मंच दिया.

Cannes 2025: कान क्लासिक में 'अरण्येर दिन रात्रि' का प्रदर्शन, शर्मिला टैगोर और सिमी ग्रेवाल की उपस्थिति में हुआ. सत्यजीत रे की इस क्लासिक फिल्म को 55 साल बाद संरक्षित रूप में दिखाया गया.

Indian Film in cannes 2025: कान फिल्म फेस्टिवल में नीरज घायवान की फिल्म 'होमबाउंड' को दर्शकों से 10 मिनट तक तालियों के साथ जबरदस्त सराहना मिली, मार्टिन स्कॉर्सेसे भी फिल्म से बेहद प्रभावित हुए.

Patriotic Song: लोकप्रिय भोजपुरी सिंगर मनोज तिवारी का भारतीय सेना को समर्पित ‘सिंदूर की ललकार’ सॉन्‍ग आ चुका है. इसमें ऑपरेशन सिंदूर की वीरता का गान है, आतंकवाद और पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया गया है.

CANNES FILM FESTIVAL के नियमों के अनुसार ऐसी फिल्म को उद्घाटन फिल्म बनाया जा सकता है, जो उसी दिन फ्रांस के सिनेमा घरों में रिलीज हो रही हो. अब से पहले टॉम क्रूज 75वें कान फिल्म फेस्टिवल (2022) में अपनी फिल्म ‘टाप गन मावेरिक’ लेकर आए थे.

78 वें कान फिल्म फेस्टिवल की झलकियां देखने लायक हैं. इसमें दिखाया गया कि 1937 के स्टालिन युग में युवा प्रोसेक्यूटर अलेक्जेंडर कोर्निएव एक खून से लिखे पत्र से शुरू हुई यात्रा में एनकेवीडी के अत्याचारों का पर्दाफाश करता है, पर खुद जेल में बंद हो जाता है.