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Hormuz Strait

US Israel Iran conflict: अमेरिकी सेन्ट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि वायुसेना ने ईरान की तटरेखा पर मौजूद मिसाइल साइट्स पर 5,000 पाउंड वजनी बंकर बस्टर बम से एयरस्ट्राइक की है.

India oil supply: मध्य पूर्व संकट और ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के ऐलान के बीच भारत में तेल और गैस को लेकर चिंता बढ़ी. संसद की स्थायी समिति ने बैठक कर बताया कि कच्चे तेल की आपूर्ति स्थिर है.

US Israel Iran conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल और ऊर्जा पर निर्भर देशों को अमेरिका का साथ देना चाहिए. उन्होंने चीन, जापान और दक्षिण कोरिया का उदाहरण देते हुए सहयोगियों की हिचकिचाहट पर नाराजगी जताई.

US Israel Iran conflict: ईरान द्वारा होर्मुज़ स्ट्रेट बंद करने से तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उनकी सेना ने ईरान को कमजोर कर दिया है और अन्य देशों से सैन्य मदद मांगी है लेकिन अभी तक कोई देश आगे नहीं आया.

India LPG crisis: भारत में LPG संकट के बीच ईरान ने दो भारतीय टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी. ईरान के राजदूत ने भारत को मित्र बताया और साझा हितों पर जोर दिया.

मिडिल ईस्ट संकट के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में फंसे 24 भारतीय जहाजों और 600 क्रू को निकालने के लिए केंद्र सरकार ने हाई-लेवल कमेटी बनाई. अमित शाह, एस. जयशंकर और हरदीप पुरी की टीम ईरान से सुरक्षित रास्ते पर बातचीत कर रही है...

मिडिल ईस्ट युद्ध से होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा, पाकिस्तान में पेट्रोल संकट से स्कूल-दफ्तर बंद; लेकिन भारत के पास 74 दिनों का SPR रिजर्व, 40+ देशों से तेल आयात और 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग. साथ ही सोलर, EV, हाइड्रोजन और घरेलू LPG उत्पादन में 25% बढ़ोतरी जैसी मोदी सरकार की दूरदर्शी नीतियों ने भारत को वैश्विक तेल संकट से काफी हद तक सुरक्षित रखा है...

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सऊदी से तेल लेकर आ रहा ‘शेनलोंग’ टैंकर सुरक्षित मुंबई बंदरगाह पहुंच गया. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री की बातचीत के बाद भारत के ऊर्जा हितों को राहत मिली...

US Israel Iran conflict: थाईलैंड के कार्गो जहाज मयूरी नारी पर होर्मुज स्ट्रेट के पास हमला हुआ. जहाज भारत की ओर जा रहा था. थाई नौसेना ने 20 नाविकों को बचाया, जबकि 3 लापता हैं.

Strait of Hormuz के विकल्प के रूप में यूएई और ओमान का प्रोजेक्ट यदि पूरा होता है, तो यह पश्चिम एशिया के समुद्री नक्शे को पूरी तरह बदल देगा. ये भारत सहित उन तमाम देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा जो अपनी तेल जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं.