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Human Rights

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने में देरी करने पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि पूछताछ कक्ष में सीसीटीवी कैमरे मानवाधिकार सुनिश्चित करने और पुलिस अत्याचार रोकने के लिए जरूरी हैं.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाले 83 वर्षीय जागेश्वर प्रसाद अवधिया की जिंदगी एक झूठे आरोप ने बदल दी. साल 1986 में लगे 100 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप ने उनकी नौकरी,परिवार और सम्मान सब छीन लिया. अब,39 साल बाद हाईकोर्ट ने उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया है. लेकिन न्याय मिलने में हुई देरी ने उनके जीवन को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है.अवधिया इस केस से बरी होने के बाद अब सरकार से अपनी बकाया पेंशन और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं, ताकि अपने जीवन के बचे हुए दिन सुकून से गुजार सकें.

सुप्रीम कोर्ट 17 सितंबर को एल्गार परिषद-माओवादी मामले में गिरफ्तार दलित अधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा. पहले सुनवाई एएसजी एसवी राजू की मांग पर टाल दी गई थी.

Mir Yaar Baloch: बलूचिस्तान के लोग आईएस-खुरासान (आईएस-के) के शिकार हो रहे हैं. आईएस-के आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की एक शाखा है, जिसे देश की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) फलने-फूलने दे रही है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने लामपुर हिरासत केंद्र में बंदियों के साथ कथित मारपीट और CCTV निगरानी में लापरवाही के मामले को गंभीरता से लेते हुए गृह मंत्रालय को जांच का निर्देश दिया है. कोर्ट ने एजेंसियों द्वारा जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति पर नाराज़गी जताई और कहा कि CCTV फुटेज जानबूझकर जांच से छिपाई जा रही है.

Bangladesh में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों को लेकर ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) ने गंभीर चिंता जताई है.

Pakistan News: महिला को मारने वालों में इसका भाई भी शामिल था. इसलिए यह मामला 'ऑनर किलिंग' का है. बताया जा रहा है कि महिला ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर अपनी मर्जी से एक पुरुष से संबंध रखी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने असम पुलिस द्वारा एक महिला को कथित रूप से गैरकानूनी हिरासत में रखने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है. याचिका में महिला की तत्काल रिहाई और अवैध निर्वासन की प्रथा पर रोक लगाने की मांग की गई है.

बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों की दयापूर्ण रिहाई की मांग को लेकर नालसा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें 25,982 कैदियों की रिहाई की रिपोर्ट भी शामिल है.

देश की जेलों में 75% से अधिक विचाराधीन कैदी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार लोग शामिल हैं. नालसा ने इन कैदियों की दयापूर्ण रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है.