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indian economy

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत की आर्थिक वृद्धि संतुलित हो रही है. जीडीपी में निजी खपत की हिस्सेदारी बढ़ी है, जबकि राजकोषीय घाटा ₹11.70 लाख करोड़ तक पहुंच गया है.

बीसीजी रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि स्थिर बनी हुई है. जीडीपी वृद्धि दर 6-7% रहने का अनुमान है, जबकि मुद्रास्फीति घटी और जीएसटी संग्रह बढ़कर उच्चतम स्तर पर पहुंचा.

जनवरी में भारत का जीएसटी संग्रह 1.96 लाख करोड़ के उच्चतम स्तर पर पहुंचा. मुद्रास्फीति में गिरावट और विनिर्माण पीएमआई में सुधार से आर्थिक संकेतक सकारात्मक नजर आ रहे हैं.

भारत की अर्थव्यवस्था ने तीसरी तिमाही में 6.3% की दर से वृद्धि की है, जो सरकारी खर्च के कारण हुई. हालांकि, उपभोक्ता मांग कमजोर रही, और दीर्घकालिक विकास में चुनौतियां बनी हुई हैं.

महाकुंभ मेले से अब तक 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार हुआ है, जिससे यह देश के सबसे बड़े आर्थिक आयोजनों में शामिल हो गया है. यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व का है, बल्कि आर्थिक उन्नति का भी प्रतीक है.

अप्रैल-दिसंबर 2024 में एनआरआई बैंक खातों में 43 प्रतिशत फंड बढ़ा, जिसमें 13.33 बिलियन डॉलर का जमा हुआ. एनआरआई जमा योजनाओं में एफसीएनआर जमा, एनआरई जमा और एनआरओ जमा शामिल हैं.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, भारत 2025-26 में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा. आईएमएफ और विश्व बैंक ने क्रमशः 6.5 प्रतिशत और 6.7 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है.

एक्सिस सिक्योरिटीज द्वारा फरवरी महीने के लिए जारी सीआईओ मेमो के अनुसार, सरकारी खर्च में तेजी आने और निजी क्षेत्र में पूंजीगत व्यय में सुधार के कारण तिमाही आय में क्रमिक रूप से सुधार होने की उम्मीद है.

वित्त मंत्रालय के व्यय सचिव मनोज गोविल के अनुसार, 8वां वेतन आयोग अप्रैल तक गठित हो सकता है और इसका आर्थिक प्रभाव 2026-27 के वित्तीय वर्ष से देखने को मिलेगा.

भारत का दवा उद्योग 2047 तक 350 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल कर सकता है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 10-15 गुना ज्यादा होगा.