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narendra modi

पीएम मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "2014 से ही मैं लगातार, हर पल ग्रामीण भारत की सेवा में लगा हूं. गांव के लोगों को गरिमापूर्ण जीवन देना मेरी सरकार की प्राथमिकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ के संकल्प के तहत 3 जनवरी को दिल्ली के अशोक विहार स्थित स्वाभिमान अपार्टमेंट में इन-सीटू स्लम पुनर्वास परियोजना के तहत झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए बनाए गए नए फ्लैट्स का दौरा करेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए शाहरुख खान ने कहा, "हमारे देश में WAVES - एक फिल्म और मनोरंजन जगत की शिखर बैठक के आयोजन का मैं बड़ी उत्सुकता से इंतजार कर रहा हूं.

वर्ष 2024 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण क्षणों का साल रहा. राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण इन घटनाओं को इन तस्वीरों के माध्यम से समझा जा सकता है.

भारत के आर्थिक सुधारों के सूत्रधार मनमोहन सिंह का बीते 26 दिसंबर को 92 वर्ष की आयु में दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. वे 2004 से 2014 के बीच 10 वर्षों तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता और सरकार के मंत्रियों ने निगमबोध घाट पर डॉ. मनमोहन सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि दी.

ये घटना लगभग 11 साल पहले 2013 की है. उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी. तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ने शरीफ की क्लास लगा दी थी.

FDI भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य में अवसंरचना क्षेत्र में बड़े निवेशों की आवश्यकता होगी. इसके अलावा, FDI प्रवाह से भुगतान संतुलन बनाए रखने और रुपये की वैल्यू को स्थिर रखने में मदद मिलती है.

सियासी गलियारों में आंकड़े कितने अहमियत रखते हैं ये हर राजनीतिक दल और सरकार जानती है. नंबर गेम का ही पज्जल था जिसने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरा दी थी.

अभी हाल में तीन छात्रों की हत्या ने कनाडा की कानून व्यवस्था, भारतीयों की सुरक्षा और सरकार की मंशा पर गंभीर शक पैदा हो रहा है. कनाडा में भारतीय छात्रों को प्रमुख दस्तावेजों को फिर से जमा करने के लिए आमजन, शरणार्थी और नागरिकता (आईआरसीसी) से दो चार होना पड़ रहा है, जिससे चिंता बढ़ गई है.

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