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Work Life Balance

डिजिटल दौर में काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बिगड़ने की बढ़ती चिंता के बीच एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में एक अहम निजी सदस्य विधेयक पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य कर्मचारियों को मानसिक तनाव और लगातार उपलब्ध रहने के दबाव से राहत दिलाना है। ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल, 2025’ नामक इस प्रस्तावित कानून में कर्मचारी कल्याण प्राधिकरण (एम्प्लॉई वेल्फेयर अथॉरिटी) के गठन का प्रावधान किया गया है, जो कर्मचारियों को काम के तय समय और अवकाश के दौरान ऑफिस से जुड़े फोन कॉल, ई-मेल और मैसेज का जवाब न देने का कानूनी अधिकार देगा। यह विधेयक 5 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया। इसके बाद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह पहल डिजिटल कल्चर से पैदा हो रहे तनाव, थकान और बर्नआउट को कम करने में मदद करेगी। उनके मुताबिक, लगातार ऑनलाइन रहने की मजबूरी न केवल कर्मचारियों की निजी जिंदगी को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल रही है। ऐसे में यह बिल बेहतर जीवन गुणवत्ता और स्वस्थ वर्क–लाइफ बैलेंस को बढ़ावा देने की दिशा में एक जरूरी कदम है।

Work-Life Balance: भागदौड़ भरी जिंदगी में काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. सही वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए फ्लेक्सिबल रूटीन, उम्मीदें सीमित करना, ब्रेक लेना, सेल्फ-केयर और जरूरत पड़ने पर मदद लेना जरूरी है.

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में कार्य घंटे को 70-90 घंटे प्रति सप्ताह तक बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. सरकार ने श्रमिकों के अधिकारों और मौजूदा श्रम कानूनों को प्राथमिकता देने की बात कही है.