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इन्वेस्टमेंट का ‘गोल्डन’ चांस या अभी और गिरेंगे दाम? मिडिल ईस्ट संकट के बीच सोने-चांदी पर बड़ी अपडेट

पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन इसके बावजूद सोने और चांदी की चमक फीकी पड़ रही है. शुक्रवार को चांदी 0.7% और सोना 0.3% गिरकर बंद हुआ. इस रिपोर्ट में समझें कि अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों के कारण बाजार की चाल कैसे बदल गई है.

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Gold Silver Price Today: पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव चरम पर है, चारों तरफ बारूद की गंध है और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. अमूमन ऐसी स्थिति में सोने और चांदी की कीमतें रॉकेट की रफ़्तार से बढ़ती हैं, क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर भागते हैं. लेकिन इस बार बाजार की चाल ने सबको हैरान कर दिया है. युद्ध के बीच भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. आइए समझते हैं कि आखिर माजरा क्या है और आपकी जेब पर इसका क्या असर होने वाला है.

क्या हैं आज के रेट?

सबसे पहले बात कर लेते हैं आज के भाव की. शुक्रवार को भारतीय बाजार में चांदी की कीमतों में करीब 0.7% की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह 2.66 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पास आ गई है. वहीं, सोने की बात करें तो इसमें भी 0.3% की सुस्ती देखी गई और यह 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है. सिर्फ भारत ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इस हफ्ते कीमती धातुओं की कीमतों में 1% से ज्यादा की कमी आई है.

युद्ध के बीच क्यों गिर रहा है सोना?

यह सवाल हर किसी के मन में है कि जब दुनिया युद्ध की दहलीज पर खड़ी हो, तो सोना सस्ता क्यों हो रहा है? इसकी वजह है ‘महंगाई और ब्याज दरों का कनेक्शन’. दरअसल, मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. तेल महंगा होने का मतलब है कि दुनिया भर में महंगाई और बढ़ेगी.

अब खेल यहां शुरू होता है. जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिका का केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने से कतराता है. बाजार को उम्मीद थी कि जल्द ही ब्याज दरें गिरेंगी, लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा. ऊंची ब्याज दरों का मतलब है मजबूत डॉलर, और जब डॉलर ताकतवर होता है, तो सोने की चमक थोड़ी फीकी पड़ जाती है. यही वजह है कि सुरक्षित निवेश होने के बावजूद सोने पर दबाव बना हुआ है.

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इतिहास की सबसे बड़ी चुनौती

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने साफ़ चेतावनी दी है कि यह वैश्विक तेल बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा ‘सप्लाई संकट’ हो सकता है. अगर यह जंग लंबी खिंचती है और तेल के दाम ऊंचे बने रहते हैं, तो सोने की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है.

हालांकि, घबराने की बात नहीं है, क्योंकि निवेशकों के लिए सोना अब भी पसंदीदा बना हुआ है. इस साल अब तक सोने ने लगभग 18% का शानदार रिटर्न दिया है और यह लगातार 5,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिका हुआ है.

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-भारत एक्सप्रेस



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