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कबाड़ से रेलवे मालामाल: हुई 6800 करोड़ की कमाई, क्या है सरकार का जनता में लौटाने का प्लान

Indian Railways Scrap Sales: भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में स्क्रैप यानी कबाड़ की नीलामी कर 6,813.86 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड कमाई की है. साथ ही विज्ञापनों और संपत्तियों के जरिए नॉन-फेयर रेवेन्यू (NFR) में भी 168% का उछाल आया है. जानें रेलवे इस पैसे का कहां इस्तेमाल कर रहा है?

Indian Railways scrap sales earnings

Indian Railways Scrap Sales: अक्सर हमारे घरों में पड़े कबाड़ को हम मामूली समझकर औने-पौने दामों में निकाल देते हैं, लेकिन जब बात देश के सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट नेटवर्क यानी भारतीय रेलवे (Indian Railways) की हो, तो यही कबाड़ सोने की खान बन जाता है. सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है. भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने डिपो, यार्ड और वर्कशॉप में पड़े पुराने और बेकार सामान (स्क्रैप) से करोड़ों की कमाई की है.

रेलवे ने कबाड़ को पारदर्शी तरीके से बेचकर 6,800 करोड़ रुपए से ज्यादा की बंपर कमाई की है. यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि इसके जरिए रेलवे न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति को फौलादी बना रहा है, बल्कि बिना यात्री किराया बढ़ाए अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का रास्ता भी साफ कर रहा है.

लक्ष्य से कहीं आगे निकला रेलवे (Indian Railway revenue FY 2025-26)

सरकार ने रविवार को आधिकारिक रूप से बताया कि रेलवे ने चालू वित्त वर्ष (2025-26) में 6,000 करोड़ रुपए के स्क्रैप बिक्री लक्ष्य के मुकाबले 6,813.86 करोड़ रुपए की शानदार कमाई की है. यह कोई पहला मौका नहीं है जब रेलवे ने अपने लक्ष्य को पीछे छोड़ा है. पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी रेलवे ने 5,400 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले 6,641.78 करोड़ रुपए की कमाई की थी. अधिकारियों के मुताबिक, स्क्रैप निस्तारण की इस पहल से रेलवे को तीन बड़े फायदे हो रहे हैं.

  • खाली पड़े विशाल यार्ड्स और डिपो में नई जगह (Space) बन रही है.
  • कबाड़ की रीसाइक्लिंग (Recycling) के जरिए पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल रही है.
  • पारदर्शी नीलामी व्यवस्था से भ्रष्टाचार खत्म हुआ है और कामकाज बेहतर हुआ है.

नॉन-फेयर रेवेन्यू में भारी उछाल (Non-Fare Revenue Indian Railways)

स्क्रैप बिक्री के अलावा, टिकट से इतर होने वाली कमाई (Non-Fare Revenue – NFR) भी रेलवे के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है. स्टेशन विकास, विज्ञापन (Advertising) और रेलवे की खाली संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग से होने वाली यह कमाई लगातार आसमान छू रही है. आंकड़े बताते हैं कि 2021-22 में यह आय करीब 290 करोड़ रुपए थी, जो 2025-26 में बढ़कर 777.76 करोड़ रुपए हो गई है. यह सीधे तौर पर 168 प्रतिशत की शानदार बढ़त है.

स्टेशनों पर खुल रही हैं प्रीमियम दुकानें (Premium brand shops railway stations)

नॉन-फेयर कमाई को और अधिक बढ़ाने के लिए रेलवे ने एक नई रणनीति अपनाई है. अब रेलवे स्टेशनों पर ‘प्रीमियम ब्रांडेड दुकानों’ (Premium Branded Shops) की शुरुआत की गई है. इसके तहत नामी कंपनियों के सिंगल-ब्रांड आउटलेट्स खोलने के लिए ठेके दिए जा रहे हैं और अब तक 22 प्रीमियम ब्रांड्स को रेलवे स्टेशनों पर जगह दी जा चुकी है. इससे यात्रियों को स्टेशन पर ही बेहतर खरीदारी और खान-पान के विकल्प मिल रहे हैं.

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यात्रियों की सुविधाओं में निवेश (Indian Railway monetization success)

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी कवायद में आम यात्रियों पर किराए का एक पैसे का भी बोझ नहीं डाला गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्क्रैप और NFR से होने वाली इस हजारों करोड़ की अतिरिक्त आय को सीधे तौर पर यात्रियों की सुविधाओं में निवेश (Invest) किया जा रहा है. इसी पैसे से स्टेशनों पर साफ-सफाई, डिजिटल सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था (CCTV आदि) और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है. कुल मिलाकर, रेलवे का यह ‘कबाड़ से कमाई’ का मॉडल देश के विकास में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है.



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