मिडिल ईस्ट में छिड़ी ईरान और इजरायल की जंग का असर अब भारत की रसोई तक पहुंच गया है. पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एलपीजी सिलेंडर की किल्लत की खबरें और गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारों की तस्वीरों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है. लोग डर के मारे हड़बड़ी में गैस सिलेंडर बुक कर रहे हैं, जिससे बाजार में एक कृत्रिम संकट जैसा माहौल बन गया है. लेकिन क्या सच में भारत में गैस खत्म होने वाली है? आइए, इस हकीकत को समझते हैं.
घबराहट में बुकिंग न करें
सबसे पहले तो यह समझ लीजिए कि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त रिजर्व मौजूद है. गैस एजेंसियों के बाहर जो भीड़ दिख रही है, वह किसी सप्लाई की कमी के कारण नहीं, बल्कि लोगों की ‘पैनिक बुकिंग’ (Panic Booking) का नतीजा है. युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई को लेकर जो अनिश्चितता बनी है, उसे देखते हुए लोग एहतियातन एक के बाद एक सिलेंडर भरवा रहे हैं, जिससे व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है. सरकार का साफ कहना है कि किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है, आपूर्ति सामान्य है.
महंगाई का झटका
चिंता के बीच आम आदमी की जेब पर एक और बड़ा प्रहार हुआ है. 7 मार्च को ही ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL) ने एलपीजी की कीमतों में संशोधन किया है. घरेलू (14 किग्रा) सिलेंडर के दाम में 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है. इस झटके ने आम परिवारों के साथ-साथ होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के बजट को भी हिलाकर रख दिया है. युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों का हवाला देकर यह बढ़ोत्तरी की गई है, जिससे फ्यूल की लागत बढ़ गई है.
LPG बुकिंग के नियम में बड़ा बदलाव
इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने एक कड़ा कदम उठाया है. अब एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव कर दिया गया है. पहले आप 21 दिनों के अंतराल पर नया सिलेंडर बुक कर सकते थे, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है. सरकार का यह फैसला जमाखोरी (Hoarding) रोकने के लिए लिया गया है. इसका मतलब यह है कि अब आपको हर 25 दिन से पहले सिलेंडर नहीं मिलेगा. इस सख्ती का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गैस की कालाबाजारी न हो और हर जरूरतमंद को सिलेंडर मिल सके.
सरकार का ‘एक्शन मोड’
पेट्रोलियम मंत्रालय भी पूरी तरह अलर्ट मोड में है. मंत्रालय ने देश की सभी ऑयल रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ाएं और इस अतिरिक्त उत्पादन का मुख्य उद्देश्य घरेलू जरूरतों को पूरा करना रखें. युद्ध की अनिश्चितताओं के बावजूद सरकार भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती.
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-भारत एक्सप्रेस
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