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नपीसीआई ने UPI MDR के लिए किया नया ऐलान, जानिए आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा असर

एनपीसीआई ने ऐलान किया है कि यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को दीपावली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा. 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगने वाले इस शुल्क का भुगतान केवल व्यापारी करेंगे, ग्राहकों पर इसका असर नहीं पड़ेगा.

NPCI UPI MDR Framework Implementation After Diwali 2026

UPI पेमेंट करने वालों के लिए राहत

NCPI New Update on UPI MDR  : अगर आप भी रोजाना की खरीदारी से लेकर छोटे-बड़े भुगतानों के लिए धड़ल्ले से UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने साफ कर दिया है कि बहुप्रतीक्षित यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क को अब आगामी दीपावली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा.

हालांकि, NPCI ने अभी इसके लागू होने की सटीक तारीख का ऐलान नहीं किया है, लेकिन यह साफ है कि त्योहारों का सीजन खत्म होते ही यह नया नियम प्रभावी हो जाएगा.

क्यों लिया गया फैसला?

NPCI की UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने हाल ही में यह अहम फैसला लिया है. दरअसल, त्योहारी सीजन के दौरान देश भर में खरीदारी और डिजिटल ट्रांजैक्शन का ग्राफ काफी ऊपर रहता है. व्यापारी संगठनों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट गेटवे ऑपरेटरों ने एनपीसीआई से अनुरोध किया था कि त्योहारों की भारी बिक्री के बीच इस नए फ्रेमवर्क को लागू न किया जाए, ताकि बाजार पर इसका कोई विपरीत असर न पड़े. व्यापारियों की चिंताओं को समझते हुए ही एनपीसीआई ने इसकी डेडलाइन को दीपावली तक टालने का समझदारी भरा कदम उठाया है.

क्या होता है MDR और कितना लगेगा शुल्क?

पिछले महीने ही यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन (P2M) के लिए एमडीआर 0.4 प्रतिशत यानी 40 बेसिस पॉइंट्स तय किया था. आसान शब्दों में समझें तो एमडीआर वह फीस या चार्ज होता है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले व्यापारियों (मर्चेंट्स) से वसूला जाता है.

0.4 प्रतिशत के इस शुल्क का मतलब है कि अगर कोई ग्राहक किसी व्यापारी को 2,000 रुपये का भुगतान करता है, तो उस पर 8 रुपये या फिर 10,000 रुपये के पेमेंट पर 40 रुपये तक का खर्च आ सकता है. हालांकि, सरकार और एनपीसीआई पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि यह एमडीआर शुल्क केवल व्यापारियों से ही लिया जाएगा. व्यापारी किसी भी परिस्थिति में इस शुल्क को ग्राहकों से वसूल नहीं सकते हैं, यानी ग्राहकों के लिए यूपीआई से पेमेंट करना पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि भुगतान बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते इस नियम से आम उपभोक्ताओं की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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