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सिविल प्रकृति के विवाद में आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बदायूं के एक विवादित जमीन मामले में धोखाधड़ी के आरोप में दर्ज आपराधिक केस की कार्यवाही पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने शिकायतकर्ता से जवाब मांगा है और याची पक्ष ने आरोपों को झूठा बताया है. मामला अब अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया गया है.

Allahabad High Court

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बदायूं जिले के थाना सिविल लाइन क्षेत्र मे धोखाधड़ी के आरोप दर्ज आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है और शिकायतकर्ता जितेन्द्र सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मुकदमा अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन /जुडिशल मजिस्ट्रेट बदायूं की अदालत में चल रहा है.

शिकायतकर्ता ने कंप्लेंट दाखिल कर याची विपिन व अन्य आठ लोगों पर मृत व्यक्ति की पावर आफ अटार्नी से धोखाधड़ी कर जमीन का बैनामा करने का आरोप लगाया है. इसी मामले में सिविल वाद भी चल रहा है. याचिका में कोर्ट से जारी सम्मन व केस कार्यवाही को रद किए जाने की मांग की गई है. यह आदेश न्यायमुर्ति संजय कुमार पचौरी ने विपिन की याचिका पर अधिवक्ता सुनील चौधरी को सुनकर दिया है.

सिविल विवाद के बावजूद आपराधिक केस दर्ज

इनका कहना है कि शिकायतकर्ता झूठे आरोप लगाकर जमीन को हड़पना चाहता है.  सुखराम ने संजय सिंह को वर्ष 2011 में अपनी मृत्यु से पहले पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी दिया था इस आधार पर 2011 में संजय ने जमीन छत्रपाल को बेच दिया था और छत्रपाल ने 2022 में चार लोगों को जमीन बेच दिया जिसमें याची गवाह है.  जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि पावर पावर ऑफ अटॉर्नी फर्जी था क्योंकि सुखराम की हत्या 2011 हो चुकी थी और हत्या के बाद उनकी पत्नी पुत्र ने शिकायतकर्ता के पक्ष में बैनामा कर दिया था. छत्रपाल व अन्य व शिकायतकर्ता दोनों ने एक दूसरे का बैनामा निरस्तीकरण का सिविल मुकदमा किया है जो विचाराधीन है.  इसके बावजूद याची के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया गया है.
न्यायालय ने राज्य सरकार व शिकायकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और निचली अदालत की कार्यवाही पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है. अगली सुनवाई 8 सप्ताह बाद होगी.


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भारत एक्सप्रेस



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