रामनगरी अयोध्या के जानकी घाट स्थित प्रसिद्ध डांडिया मंदिर में महंत रामलखन दास की पुण्यतिथि पर आयोजित भंडारे के दौरान दूध को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मंदिर में खीर और प्रसाद तैयार करने के लिए मंगाए गए करीब 2 क्विंटल दूध की गुणवत्ता बेहद संदेहास्पद पाई गई. बताया जा रहा है कि यह दूध स्थानीय ‘पराग डेयरी’ से सप्लाई हुआ था.
भंडारे के लिए जैसे ही दूध के डिब्बे खोले गए, परिसर में दुर्गंध फैल गई. डिब्बे के भीतर दूध के ऊपर मरी हुई मक्खियां तैर रही थीं और रबर जैसी मोटी परतें जमी हुई मिलीं, जिसे देखकर मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालु दंग रह गए.
रासायनिक मिलावट की आशंका
दूध की असामान्य और भयावह स्थिति को देखते हुए मंदिर से जुड़े लोगों ने इसमें हानिकारक रसायनों की मिलावट का अंदेशा जताया है. श्रद्धालुओं की सेहत और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए मंदिर प्रबंधन ने इस दूध का प्रसाद बनाने में उपयोग नहीं किया.
खाद्य विभाग को तत्काल सूचित करने के बाद एहतियातन पूरे दो क्विंटल दूध को नाले में बहा दिया गया.
खाद्य विभाग ने सील किए सैंपल
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डांडिया मंदिर के महंत व महामंडलेश्वर स्वामी गिरीश दास ने पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग को मौके पर बुलाया. सूचना मिलते ही खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पहुंचकर दूध के सैंपल सील किए और विस्तृत जांच के लिए लैब भेज दिए.
महंत स्वामी गिरीश दास ने खाद्य सुरक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि विभाग जल्द साफ करे कि दूध में दिख रही रबर जैसी परतें क्या थीं. यदि लैब रिपोर्ट में मिलावट या लापरवाही साबित होती है, तो पराग डेयरी प्रशासन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.
खाद्य पदार्थों की चेकिंग की मांग
अयोध्या में रोजाना लाखों श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में प्रमुख मंदिरों में इस तरह के संदिग्ध दूध की आपूर्ति से श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. महंत गिरीश दास ने मांग उठाई है कि प्रशासन को न केवल डेयरियों, बल्कि खुले बाजार में बिक रहे दूध और अन्य खाद्य सामग्रियों की भी बड़े पैमाने पर गुणवत्ता जांच करनी चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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