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अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT ने क्या-क्या सुझाव दिए? 8 प्वाइंट आए सामने

SIT Report Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या राम मंदिर परिसर दान चोरी प्रकरण में विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के सुझाव सामने आए हैं. सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने सीसीटीवी बैकअप बढ़ाने, साप्ताहिक ऑडिट करने और ट्रस्ट के पुनर्गठन सहित 8 बड़े सुझाव दिए हैं.

SIT Report Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case

SIT Report Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में हुए दान चोरी प्रकरण ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. इस बेहद संवेदनशील मामले की गुत्थी सुलझाने और भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है. एसआईटी ने इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल करने के बाद शासन और संबंधित अधिकारियों को एक बेहद महत्वपूर्ण प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर कई कड़े और बड़े सुझाव दिए गए हैं.

एसआईटी की यह आधिकारिक रिपोर्ट अभी तक पब्लिक डोमेन (Ayodhya Ram Mandir SIT Investigation) में नहीं आई है. विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस गोपनीय रिपोर्ट में मंदिर के चढ़ावे की सुरक्षा से लेकर ट्रस्ट के ढांचे तक में आमूलचूल बदलाव करने की पुरजोर वकालत की गई है. जिसके बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ तक प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है.

SIT के 8 बड़े सुझाव (Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case)

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में मंदिर की सुरक्षा, ऑडिट और मैनेजमेंट को फुलप्रूफ बनाने के लिए निम्नलिखित आठ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. इसमें 8 चीजें सरकार को सुझाई गई हैं.

  1. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नए सिरे से पुनर्गठन किया जाए और इसके सभी सदस्यों को समान रूप से जिम्मेदारियां सौंपी जाएं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
  2. राम जन्मभूमि मंदिर के संपूर्ण प्रशासनिक कार्यों की देखरेख के लिए एक पेशेवर प्रशासनिक अधिकारी यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की स्थाई नियुक्ति की जाए.
  3. विश्व के अन्य बड़े और अमीर मंदिरों की तर्ज पर अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन के लिए भी पूरी तरह से कॉरपोरेट और पेशेवर तरीकों को अपनाया जाए.
  4. मंदिर में आने वाली भारी-भरकम दान राशि की गणना और उसके हिसाब-किताब का हर हफ्ते अनिवार्य रूप से ‘साप्ताहिक ऑडिट’ कराया जाए.
  5. प्रतिदिन मंदिर के चढ़ावे में आने वाली नकदी (कैश) की बारीकी से गणना हो और उसी दिन उसकी डिजिटल व फिजिकल बहीखाते में आधिकारिक एंट्री दर्ज की जाए.
  6. राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत की ओर से पूर्व में दिए गए सभी निर्देशों का अक्षरशः और पूर्णतया पालन सुनिश्चित हो.
  7. मंदिर परिसर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों के डेटा स्टोरेज की क्षमता को वर्तमान 45 दिनों से 4 गुना बढ़ाकर सीधे 180 दिन (6 महीने) किया जाए.
  8. दान की गणना करने वाले कर्मचारियों की विशेष ड्रेस हो. साथ ही, गणना कक्ष में आते और जाते समय इन कर्मचारियों की सघन मेटल डिटेक्टर चेकिंग की जाए.

150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ (Ayodhya Theft Suspects List)

सूत्रों के हवाले से सबसे बड़ी खबर यह है कि प्राथमिक जांच में दोषी या संदिग्ध पाए गए 8 प्रमुख चेहरों पर जल्द ही बड़ी दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई की संस्तुति (सिफारिश) की जा सकती है. इन संदिग्धों की सूची में निम्नलिखित नाम शामिल हैं.

  • अनुकल्प मिश्र
  • लव कुश मिश्रा
  • मनीष यादव
  • राजेश पाठक
  • रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू
  • अवनीश शुक्ला
  • कृष्ण देव तिवारी
  • सुभाष श्रीवास्तव

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जांच के दायरे और की गई कार्रवाई की क्रोनोलॉजी को समझें तो यह मामला काफी बड़ा हो चुका है. एसआईटी ने अपनी जांच के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, वरिष्ठ सदस्य डॉक्टर अनिल मिश्रा और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव समेत 150 से अधिक अधिकारियों, कर्मचारियों और सेवादारों से कड़ी पूछताछ की है. जांच टीम ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई संदिग्धों को जांच पूरी होने तक किसी भी परिस्थिति में अयोध्या न छोड़ने की सख्त हिदायत (सलाह) दी है. एसआईटी के इन कड़े रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में राम मंदिर दान चोरी मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सकता है.



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