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सरकार Vs शंकराचार्य: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने CM योगी पर औरंगजेब वाला तंज कसा, योगी बोले- ‘साधु के वेश में कालनेमि’

माघ मेले में स्‍वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा विवाद गहराता जा रहा है. उन्‍हें गंगा में स्नान से रोका गया था, उन्‍होंने तीखे बयान दिए. आज उन्‍होंने सीएम को ‘औरंगजेब’ बोलकर तंज कसा, सीएम ने भी उनको ‘कालनेमि’ करार दे दिया.

cm Yogi vs Avimukteshwaranand

स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद Vs सीएम योगी

Swami Avimukteshwaranand Controversy: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है. यहां मौनी अमावस्या के दिन एक बड़ा विवाद शुरू हो गया. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे. पुलिस ने उनका काफिला रोक लिया. अधिकारियों ने कहा कि वे अन्य अखाड़ों की तरह पैदल चलकर स्नान करें. इस पर स्वामी नाराज हो गए. उनके शिष्यों के साथ पुलिस की धक्का-मुक्की हुई. स्वामी ने अपने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया. यह धरना अब सात दिनों से जारी है. प्रशासन ने स्वामी को दो नोटिस भेजे. पहला नोटिस उनकी पदवी शंकराचार्य के इस्तेमाल पर था. दूसरा नोटिस विवाद के बारे में जवाब मांगता था. नोटिस में मेला क्षेत्र से बाहर करने की चेतावनी भी थी. स्वामी ने दोनों नोटिसों का जवाब दे दिया.

शंकराचार्य के तीखे बयान

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर कड़े हमले किए. उन्होंने सरकार की तुलना मुगल बादशाह औरंगजेब से की. स्वामी ने कहा कि मंदिर तोड़ने वाला कोई भी व्यक्ति औरंगजेब है. चाहे वह उनका सगा भाई ही क्यों न हो. उन्होंने मुख्यमंत्री से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी न होने की बात कही. लेकिन मंदिरों की रक्षा न करने पर आरोप लगाया. स्वामी ने शिव मूर्ति और नंदी की सुरक्षा का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि योगी नाथ पंथी हैं. उन्हें शिव की रक्षा करनी चाहिए. स्वामी ने संतों पर भी टिप्पणी की. कहा कि कुछ संतों का मन योगी से जुड़ा है. लेकिन भगवान से नहीं. जब मंदिरों पर हमला होता है तो उन्हें पीड़ा नहीं होती. स्वामी ने एनडीटीवी पर बातचीत में ये बयान दिए. वे अपने स्टैंड पर अड़े रहे. धरने पर बैठे स्वामी ने सुरक्षा के लिए 10 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगवाए. उन्हें रात में खतरे की सूचना मिली थी.

मुख्यमंत्री योगी की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विवाद पर अपनी राय रखी. उन्होंने एक वीडियो में कहा कि एक योगी, संत या सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं होता. यह उनके जीवन का लक्ष्य होना चाहिए. योगी ने कहा कि संत की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती. धर्म ही उसकी संपत्ति है. राष्ट्र उसका स्वाभिमान है. अगर कोई राष्ट्र के स्वाभिमान को चुनौती दे तो खुलकर विरोध करना चाहिए. योगी ने कालनेमि का जिक्र किया. कहा कि कई कालनेमि धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश रचते हैं. हमें उनसे सावधान रहना होगा. योगी का यह बयान एक्स पर पोस्ट किया गया. इसमें एक वीडियो भी है. योगी का इशारा शायद स्वामी की तरफ था. लेकिन उन्होंने नाम नहीं लिया. यह बयान विवाद को और हवा दे रहा है.

सपा ने लपक लिया मामला

यह विवाद अब राजनीतिक हो गया है. समाजवादी पार्टी ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया. वे सरकार के खिलाफ एक्टिव हो गए. अन्य दल भी इसमें कूद पड़े. लेकिन कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ. प्रशासन अपना स्टैंड नहीं छोड़ रहा. स्वामी भी धरने से उठने को तैयार नहीं. उन्होंने कहा कि विवाद शुरू करने वाले को ही खत्म करना होगा. मुख्यमंत्री का रुख आक्रामक है. स्वामी को पता नहीं क्या हो सकता है. माघ मेला संतों और तीर्थयात्रियों का बड़ा आयोजन है. लेकिन विवाद ने सबको प्रभावित किया. संगम स्नान की बजाय विवाद की चर्चा हो रही है. प्रयागराज में तनाव का माहौल है. लोग देख रहे हैं कि यह कब खत्म होगा.

अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं: प्रशासन

अभी माघ मेला जारी है, और अविमुक्तेश्वरानंद का धरना चल रहा है. प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानने से इनकार किया. इससे विवाद और बढ़ा. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अंत उन्हीं को करना है जिन्होंने शुरू किया, आगे क्या होगा यह वक्त बताएगा.

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