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साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क तबाह: मेरठ में पिता-पुत्र गिरफ्तार, 180 आधार कार्ड और 92 डेबिट-क्रेडिट कार्ड समेत भारी सामान बरामद

CYBER CRIME: मेरठ में फर्जी जनसेवा केंद्र चलाने वाले बाप-बेटे गिरफ्तार हुए. गरीब लोगों के नकली दस्तावेज बनाकर खुलवाते थे बैंक खाते, भारी सामान बरामद किया गया

मेरठ की खबर

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

मेरठ की खबर मेरठ कत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में साइबर ठगी और जालसाजी का एक बड़ा मामला सामने आया है. साइबर सेल और थाना लिसाड़ी गेट पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए फर्जी जनसेवा केंद्र चलाने वाले दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए दोनों आरोपी आपस में बाप-बेटे हैं. ये आरोपी सीधे-साधे और गरीब लोगों को अपने झांसे में लेकर उनके नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे और फिर बैंकों में खाते खुलवाकर ऑनलाइन ठगी को अंजाम देते थे. पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जाली कागजात बरामद किए हैं.

चेकिंग के दौरान हुआ बड़ा खुलासा

मेरठ के एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर 14 जून 2026 को साइबर सेल और लिसाड़ी गेट पुलिस की टीम क्षेत्र में चल रहे जनसेवा केंद्रों की जांच कर रही थी. इसी दौरान पुलिस को इस अवैध गतिविधि की भनक लगी. पुलिस ने घेराबंदी करके मौके से दो आरोपियों को दबोच लिया. पकड़े गए आरोपियों की पहचान अरकम और उसके पिता निजामुद्दीन के रूप में हुई है. यह दोनों आरोपी मेरठ के थाना कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत अंसार कॉलोनी, गोला कुआं के रहने वाले हैं.

भारी मात्रा में बरामद हुआ सामान

पुलिस ने जब इस फर्जी जनसेवा केंद्र पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी संख्या में सरकारी दस्तावेज और बैंकिंग से जुड़ा सामान बरामद किया है.

इस तरह देते थे ठगी को अंजाम

पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरीModus Operandi (काम करने का तरीका) का खुलासा किया. आरोपियों ने बताया कि वे अपने एक अन्य साथी अबू बकर के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क को चला रहे थे. वे सबसे पहले इलाके के गरीब और सीधे-साधे लोगों को पैसों का लालच देकर या अन्य झांसे में लेकर उनके असली दस्तावेज हासिल करते थे. इसके बाद उन दस्तावेजों में हेरफेर करके नकली आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड तैयार किए जाते थे.

फर्जी खातों से होता था करोड़ों का खेल

इन जाली दस्तावेजों की मदद से आरोपी अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाते थे और उनके डेबिट व क्रेडिट कार्ड जारी करवा लेते थे. एसपी क्राइम ने बताया कि इन फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और विभिन्न पेमेंट ऐप्स के जरिए पैसों के अवैध लेन-देन (ट्रांजेक्शन) के लिए किया जाता था. इस पूरे खेल के जरिए आरोपी मोटा आर्थिक लाभ कमा रहे थे.

फरार आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस

पुलिस ने इस मामले में थाना लिसाड़ी गेट में संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और दोनों आरोपियों को जेल भेजने की तैयारी की जा रही है. इस गैंग का तीसरा सदस्य अबू बकर अभी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं. मेरठ पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और इस खेल में कौन-कौन से बैंक कर्मचारी या अन्य लोग शामिल हैं.



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