Cyber Slavery in Cambodia: मुजफ्फरनगर पुलिस ने हाल ही में एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसकी कहानी सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं. यह मामला केवल धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि ‘साइबर स्लेवरी’ यानी डिजिटल गुलामी का है, जहां हिंदुस्तानी युवाओं को बंधक बनाकर अपनों के ही खिलाफ अपराध करने पर मजबूर किया जाता है. चलिए आपको इस फॉड के बार में विस्तार से बताते हैं.
क्या है यह पूरा मामला?
मुजफ्फरनगर के शाहपुर इलाके के तावली गांव के रहने वाले वसीम नाम के युवक को अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी का सपना दिखाकर कंबोडिया बुलाया गया था. उसे बताया गया था कि वहां उसे कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करना होगा. वसीम 22 दिसंबर को सुनहरे भविष्य की उम्मीद लेकर विदेश रवाना हुआ, लेकिन वहां पहुंचते ही हकीकत कुछ और निकली. 10 जनवरी को जब वसीम किसी तरह जान बचाकर अपने घर लौटा, तो उसने जो आपबीती सुनाई, उसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी.
वसीम ने बताया कि वहां पहुंचते ही चीनी और पाकिस्तानी एजेंटों ने उसका पासपोर्ट छीन लिया. उसे एक बंद परिसर में रखा गया और मजबूर किया गया कि वह भारत के लोगों को फोन करके या ऑनलाइन तरीके से ठगे. जब उसने यह सब करने से मना किया, तो उसे बिजली के झटके दिए गए और बेरहमी से प्रताड़ित किया गया.
क्या होती है ‘साइबर स्लेवरी’?
आम तौर पर गुलामी का मतलब शारीरिक श्रम से लिया जाता है, लेकिन ‘साइबर स्लेवरी’ एक आधुनिक और खतरनाक जाल है. इसमें गिरोह युवाओं को कंप्यूटर और तकनीकी काम का झांसा देकर दूसरे देशों ले जाते हैं. वहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं ताकि वे भाग न सकें.
इसके बाद, इन युवाओं को कॉल सेंटर जैसी जगहों पर बिठाकर जबरन साइबर फ्रॉड कराया जाता है. उन्हें टारगेट दिया जाता है कि वे रोजाना भारत या अन्य देशों के लोगों से लाखों की ठगी करें. अगर कोई युवक टारगेट पूरा नहीं करता या काम करने से मना करता है, तो उसे भूखा रखा जाता है, पीटा जाता है और अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं. मुजफ्फरनगर के वसीम के साथ भी यही हुआ.
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पुलिस की कार्रवाई में बड़े खुलासे
वसीम की शिकायत पर मुजफ्फरनगर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई. एसएसपी संजय कुमार वर्मा के नेतृत्व में साइबर सेल और शाहपुर पुलिस ने छापेमारी कर इस गिरोह के दो सदस्यों, आस मोहम्मद और जावेद को गिरफ्तार कर लिया है. गिरोह का मुख्य सरगना अनवर अहमद अंसारी उर्फ शाबरी फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है.
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने मुजफ्फरनगर से ही करीब 50 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है. यही नहीं, वसीम ने जानकारी दी है कि अभी भी वहां कम से कम 15 भारतीय युवक फंसे हुए हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए मोटी फिरौती मांगी जा रही है. गिरोह की शर्त यह है कि अगर किसी को वापस जाना है, तो उसे अपने बदले तीन और लड़कों को वहां भेजना होगा.
युवाओं के लिए चेतावनी
मुजफ्फरनगर पुलिस अब इस मामले में आईबी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की मदद ले रही है. एसएसपी का कहना है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहा है.
कंबोडिया से लौटे वसीम ने देश के युवाओं से भावुक अपील की है. उसने कहा, “भाइयों, विदेश की चकाचौंध के चक्कर में न पड़ें. अपने देश में छोटा काम कर लें, वो बेहतर है. वहां नरक जैसी जिंदगी है. हमारे देश जैसा कोई देश नहीं है.”
अगर आपको भी सोशल मीडिया या किसी अनधिकृत कंसल्टेंसी के जरिए विदेश में आकर्षक नौकरी का ऑफर मिल रहा है, तो सावधान रहें. यह साइबर स्लेवरी का जाल हो सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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