नंदगांव के हुरियारे (होली खेलने वाले पुरुष) बरसाना की हुरियारिनों की लाठियों का सामना करने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं. इन दिनों नंदगांव के घरों और अखाड़ों में एक ही नजारा दिख रहा है. पुरानी ढालों की मरम्मत और नई ढालों की सजावट में जुटे हैं.
नंदबाबा मंदिर के सेवायत विष्णु गोस्वामी और कान्हा गोस्वामी बताते हैं कि लाठियों के प्रहार को झेलने के लिए ढाल का मजबूत होना बहुत जरूरी है. इसलिए खास तौर पर राजस्थान से मजबूत लकड़ी और मोटे चमड़े वाली ढालें मंगवाई जा रही हैं. इन ढालों को महीनों पहले से ‘तेल पिलाकर’ (तेल की मालिश कर) इतना सख्त बनाया जाता है कि उस पर पड़ने वाली लाठी का वार बेअसर हो जाए. सिर्फ मजबूती ही नहीं, इन ढालों को रंग-बिरंगी अबरी और धार्मिक प्रतीकों से सजाकर बिल्कुल नया लुक दिया जा रहा है.
इस बार की होली सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती होने वाली है. पिछले साल करीब 12 से 13 लाख लोग इस अद्भुत नजारे के गवाह बने थे, लेकिन इस बार यह संख्या 15 लाख के पार जाने की उम्मीद है.
देश के कोने से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से भी विदेशी सैलानी और फोटोग्राफर्स इस रोमांचक उत्सव को अपने कैमरों में कैद करने के लिए ब्रज पहुंच रहे हैं.
बाजारों में रौनक और व्यापारियों के चेहरे पर चमक
होली के इस उल्लास ने स्थानीय बाजार में भी जान फूंक दी है. बरसाना और नंदगांव की दुकानों पर अभी से भारी भीड़ देखी जा सकती है. रंग, गुलाल और पिचकारियों के अलावा पारंपरिक पोशाकों (जैसे धोती-कुर्ता और लहंगा-चुनरी) की मांग काफी बढ़ गई है.
दुकानदारों का कहना है कि इस बार ग्राहकों का उत्साह देखते ही बनता है और स्टॉक अभी से ही कम पड़ने लगा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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