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Mathura-Vrindavan

एक ओर दुनिया जहां ईरान-इजरायल-अमेरिका..पश्चिम एशिया में छिड़े सैन्य टकराव से चिंतित है, वहीं, दूसरी ओर करोड़ों सनातनी होली के हर्षोल्लास में डूबे हैं. भारतभर में हिंदू-मुस्लिम सिख और ईसाइयों के बीच जगह-जगह रंगों का उत्सव मनाया जा रहा है. ये परंपरा 5 हजार साल से ज्यादा पुरानी है, जिसका मूल श्रीराधा-कृष्ण हैं. देखें विशेष प्रस्तुति...

Braj Ki Holi 2026: ब्रज की होली भक्ति और उल्लास का मेल है. यहां खेले जाने वाली होली के प्रमुख कार्यक्रम 5 मार्च तक चलेंगे. बरसाना में 25 फरवरी को लठामार होली खेली गई, अब नंदगांव में भी 26 फरवरी ऐसी ही होली होगी. बांके बिहारी में रंगों की होली 27 फरवरी को होगी.

बरसाना में लट्ठमार होली का विश्‍व प्रसिद्ध उत्सव मनाया जा रहा है. लगभग 20 लाख श्रद्धालु रंगों में नहाने चले आए हैं, हजारों ढोल-नगाडों की धुन पर झूम रहे हैं.

इस साल होली पर चंद्रग्रहण के कारण ब्रज के प्रमुख मंदिरों, खासकर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, राधादामोदर और राधारमण मंदिरों के दर्शन और पूजा के समय में बदलाव हुआ है.

Braj ki Holi: ब्रज में होली की तैयारियां जोरों पर हैं! बांके बिहारी जी के मंदिर में लाखों लोग कश्मीरी केसर, कन्नौजिया इत्र और टेसू से बनाए गए रंग से होली खेलेंगे. बरसाना में भी टेसू के फूलों से रंग बन रहा है.

ब्रज में बरसाना की विश्वप्रसिद्ध लठामार होली के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार कठिन पैदल यात्रा का सामना करना पड़ सकता है.

Braj Ki Holi 2026: बरसाना में लठमार होली की तैयारियां जोरों पर हैं, हुरियारनें अपनी-अपनी लाठियां तेल से मजबूत करने में लगी हैं. साथ ही लहंगा-चुनरी संवारी जा रही हैं. 25 फरवरी को पुरुषों पर बरसाई जाएंगी लाठियां.

ब्रजभूमि (वृंदावन-बरसाना) की वर्ल्ड फेमस होली में इस बार दुनियाभर से 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के जुटने की संभावना है. लड्डूमार होली से 24 फरवरी को होलिकोत्सव का शुभारंभ होगा. आगामी 10 दिनों में यहां ​किस तरह से आयोजन होंगे..आइए देख लीजिए..

Braj Ki Holi 2026: ब्रज की होली में इस बार सुरक्षा को और कड़ा किया गया है. बरसाना की लठामार होली और मथुरा-वृंदावन की लड्डू होली का आनंद लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

ब्रज में होली की आहट के साथ नंदगांव के हुरियारे (होली खेलने वाले पुरुष) बरसाना की हुरियारिनों की लाठियों का सामना करने की तैयारी में जुट गए हैं. नंदबाबा मंदिर के सेवायतों के अनुसार मजबूत ढालें तैयार की जा रही हैं, जिनके लिए राजस्थान से खास लकड़ी और मोटा चमड़ा मंगवाया गया है.